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पीएम मोदी ने भाषण में 14 बार किया लोकतंत्र का जिक्र, 37 बार भारत तो 18 बार अमेरिका का लिया नाम


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाइट हाउस में अमेरिकी पत्रकार के सवाल पर जिस अंदाज में जवाब दिया था, वही कांग्रेस में भी दिखा। अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने 14 बार ‘लोकतंत्र’ शब्द का इस्तेमाल किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने बार-बार ‘लोकतंत्र’ शब्द पर जोर दिया था। भारत ने अमेरिका और अन्य पश्चिमी लोकतंत्रों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए बार-बार अपनी लोकतांत्रिक साख का प्रदर्शन किया है। साफ है कि अधिकारों और स्वतंत्रता में कमी के आरोप को दरकिनार करते हुए मोदी ने उसी भाव को फिर पेश किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘लोकतांत्रिक भावना के विकास में, भारत लोकतंत्र की जननी है।’ पीएम ने कहा, ‘पिछले साल, हमने किसी न किसी रूप में एक हजार साल के विदेशी शासन के बाद, आजादी के 75 साल से अधिक की उल्लेखनीय यात्रा का जश्न मनाया। यह सिर्फ लोकतंत्र का ही नहीं, बल्कि विविधता का भी उत्सव था।’
आलोचकों पर निशाना, अमेरिकियों को समझाना – अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री बेहद सहज दिखे। उन्होंने अमेरिकी सांसदों को समझाने की कोशिश की कि जैसे आरोप लग रहे हैं, भारत में लोकतंत्र को वैसा खतरा नहीं है। पीएम ने कहा कि ‘लोकतंत्र हमारे पवित्र और साझा मूल्यों में से एक है।’ मोदी यह जतलाना चाह रहे थे कि लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन किसी विशेष पार्टी की खासियत के बजाय एक सभ्यतागत प्रतिबद्धता थी।
पीएम ने यह कहकर कि ‘हर कोई भारत के विकास, लोकतंत्र और विविधता को समझना चाहता है’, उन आलोचकों को निशाने पर लिया जो भारतीय लोकतंत्र की जटिलता समझे बिना टीका-टिप्पणी करते हैं।
लोकतंत्र की बुनियाद पर PM मोदी का भाषण – पीएम मोदी के संबोधन में ‘लोकतंत्र’ शब्द किसी कड़ी की तरह रहा। मोदी ने कहा कि ‘अमेरिका सबसे पुराना और भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है।’ उन्होंने जोर दिया, ‘लोकतंत्र, समावेशन और स्थिरता की भावना हमें परिभाषित करती है।’ पीएम का यह कहना बहुसंख्यकवाद के आरोपों का जवाब था। उन्होंने कहा क‍ि ‘लोकतंत्र वह संस्कृति है जो विचार और अभिव्यक्ति को पंख देती है।’ इस कथन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कमी और असहमति पर अंकुश के आरोपों की प्रतिक्रिया की तरह देखा गया।