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ट्रंप के होर्मुज प्लान से बढ़ेगी भारत की मुश्किल, अमेरिकी नाकेबंदी का असर समझिए, जानें कैसे निशाने पर चीन


अमेरिकी सेना ने सोमवार से होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। सेंट्रल कमांड ने कहा है कि सोमवार 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। यह अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों पर लागू होगी। सेंट्रल कमांड ने कहा है कि यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर बिना किसी भेदभाव के लागू होगी। यानी किसी देश के जहाज को कोई छूट नहीं मिलेगी। एक्सपर्ट का कहना है कि इसका असर भारत और चीन पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
भारत और चीन की बढ़ेगी मुश्किल – भारत की ऊर्जा जरूरतों का अहम हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। वहीं, चीन ईरान के एक अहम ऊर्जा आयातक है। यह लगभग सारा आयात होर्मुज स्ट्रेट के संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। इसके पहले भारत की मुश्किलें बढ़ गई थीं, जब अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को चोक कर दिया।
भारत के कूटनीतिक प्रयासों के चलते भारतीय जहाजों को खाड़ी से निकलने की मंजूरी मिली थी। भले ही यह मंजूरी सीमित थी, लेकिन भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए यह महत्वपूर्ण थी। भारत ने हाल के दिनों में ईरान के साथ भी ऊर्जा खरीद की थी, लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के बाद यह मुश्किल में पड़ सकती है।
भारतीय टैंकरों की आवाजाही पर पड़ सकता है असर – हालांकि, अमेरिकी सेना ने कहा है कि ईरान के अलावा खाड़ी में दूसरे देशों के बंदरगाहों पर जा रहे जहाजों की आवाजाही पर रोक नहीं होगी, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान फिलहाल किस चीज की अनुमति देता है। ईरान ने इसके पहले 40 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट पर ब्लॉकेड करके यह साबित किया है कि इस जलमार्ग पर उसका नियंत्रण है। ऐसे में अगर उसके बंदरगाहों पर आवाजाही पर रोक लगाई जाती है, तो खाड़ी से किसी भी जहाज का निकलना मुश्किल होगा।
अमेरिका और ईरान आमने-सामने – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि उन जहाजों को भी रोका जाएगा जो ईरान को टोल देकर गुजर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि जो भी ईरान को अवैध टोल देगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। वहीं, ईरान ने कहा है कि होरमुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके कब्जे में है। ईरानी न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान की संसद के उपाध्याक्ष हाजी बाबाई ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए टोल टैक्स तो चुकाना ही होगा और इसे रियाल में देना होगा। रियाल ईरान की मुद्रा है।