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अमेरिकी हमलों से ईरान में मची आर्थिक तबाही, 20 लाख लोगों की नौकरियां गईं, कम खाने पर मजबूर लोग


अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से तबाह कर दिया है। सरकार ने करीब दो महीनों से देश में इंटरनेट को पूरी तरह से बंद कर रखा है जिसका असर भी खतरनाक हो चला है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हवाई हमलों से 23,000 से ज्यादा कमर्शियल प्रॉपर्टीज को नुकसान पहुंचा है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक लगभग 20 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं। तेहरान की जूता बनाने वाली वर्कशॉप से लेकर डिजिटल कंपनियों तक सभी तरह के कारोबार पर इसका असर दिखा है और इन जगहों पर भारी संख्या में लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में काम करने वाली कंपनियां भारी संख्या में लोगों को नौकरियों से निकालने पर मजबूर हैं। कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा इजाफा होने से कंपनियों के लिए उत्पादन करना मुश्किल हो गया है और इंटरनेट पर सख्ती लागू है। दशकों से चले आ रहे प्रतिबंधों और घरेलू चुनौतियों ने संकट को और भी गंभीर बना दिया है जिससे बढ़ती कीमतों के बीच लोगों के पास कोई काम नहीं है और उनके लिए जिंदगी गुजारना अत्यंत मुश्किल हो गया है।
ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से ही इंटरनेट बंद है। इसका मकसद विरोध प्रदर्शनों को रोकना और देश की जानकारी बाहर जाने से रोकना है।
ईरान में लाखों लोगों की नौकरियां और जाएंगी -अमेरिकी सेना ने होर्मुज की नाकेबंदी कर रखी है और युद्ध के फिर से शुरू होने की आशंका बनी हुई है। जिससे अनुमानों के अनुसार इस संघर्ष के कारण 20 लाख तक लोगों की नौकरियां चली गई हैं और 41 लाख अन्य लोगों पर गरीबी की चपेट में आने का खतरा मंडरा रहा है।
23,000 से ज्यादा व्यावसायिक संपत्तियों और कारखानों को नुकसान पहुंचा है जिससे क़ज़्विन और मरवदश्त जैसे केंद्रों में उत्पादन ठप पड़ गया है।
स्टील जैसे प्रमुख उद्योगों (मोबाराकेह स्टील कंपनी) ने अपना कामकाज रोक दिया है और पेट्रोकेमिकल क्षेत्रों में छंटनी की लहरें चल रही हैं।
ईरान में महंगाई दर बढ़कर 50 फीसदी को पार कर गई हैं। कुछ अनुमानों के मुताबिक महंगाई दर 180% के करीब है जिससे ईरानी रियाल की कीमत पाताल में पहुंच चुकी हैं।
इंटरनेट लगातार बंद रहने से देश की अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन 35 मिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो रहा है जिससे डिजिटल क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
अलजजीरा और फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक उपभोक्ताओं को भोजन और दवाओं सहित जरूरी सामानों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है और ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि लोग अपने भोजन की मात्रा कम कर रहे हैं। अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरानी बंदरगाहों तक सामान की पहुंच रुक गई है जिससे निर्माताओं के लिए कच्चे माल की कमी पैदा हो गई है। मजदूरों और व्यापार मालिकों ने बेरोजगारी और गरीबी में भारी बढ़ोतरी की बात कही है। क़ज़वीन और मरवदश्त जैसे औद्योगिक केंद्रों में निवासियों ने बताया कि कच्चे माल की कमी और सरकारी मदद न मिलने के कारण फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं या कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं।
पेट्रोकेमिकल उद्योग में UPVC पाइप बेचने वालों ने बताया कि उन्होंने अपना काम बंद कर दिया है क्योंकि कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण बिक्री में नुकसान होना तय है। ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक दूसरों ने बताया कि पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को हुए नुकसान के बाद कच्चे माल की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। एक कंपनी के मालिक ने ईरान इंटरनेशनल को बताया कि उसे अपने कर्मचारियों की संख्या कम करने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि ग्राहक अब अपना कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं।a