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बांग्लादेश में आखिर ऐसा क्या हो गया कि उतारनी पड़ी सेना, पूरे देश में कॉलेज, बस-ट्रेन, मेट्रो, इंटरनेट सब बंद


बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ भड़की आग तेज हो गई है। छात्रों के हिंसक प्रदर्शनों में बसों और गाड़ियों को आग के हवाले किया जा रहा है। देश में इंटरनेट सेवा ठप कर दी गई है। बस, ट्रेन और मेट्रो सब बंद हैं। हालात संभालने के लिए सेना मार्च कर रही है। बताया जा रहा है कि इन हिंसक प्रदर्शनों में कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई है और 2500 से ज्यादा लोग घायल हैं। हाल ही में बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों का प्रदर्शन तब और हिंसक हो गया, जब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रदर्शन्कारी छात्रों को रजाकार कह दिया। आरक्षण की आग में जल रहे बांग्लादेश में छात्रों को आखिर किस बात पर ऐतराज है, इसे समझते हैं।
बांग्लादेश के प्रदर्शनों को समझने के लिए पहले 1947 के भररत तक जाना होगा। आजादी से पहले हैदराबाद में भारत के एजेंट जनरल रहे डॉ. केएम मुंशी की लिखी किताब ‘The end of an era (Hyderabad Memoirs)’ में कहा गया कि भारत की आजादी के बाद देश के सामने कश्मीर मुद्दे जैसी कई समस्याएं थीं। किसी तरह की फसाद से बचने के लिए निजाम हैदराबाद और भारत सरकार के बीच स्टैंडस्टिल समझौता हुआ। इसमें अलग देश की मांग कर रहे निजाम को कुछ छूट देने की बात थी। साल भर के इस समझौते के बीच उस्मान अली के रजाकारों ने जमकर आतंक मचाया। निजाम के संकेत पर ये रजाकार कत्लेआम करते और हैदराबाद की 85 फीसदी हिंदू आबादी की औरतों के साथ रेप करते। बहुत से लोगों को धर्मांतरण करने पर मजबूर करते।