
इजरायल के साथ युद्ध के दौरान ईरान की कई मिसाइलें उसके शहर हाइफा तक पहुंची, जो बंदरगाह शहर है। वहीं इजरायल के निशाने पर भी ईरान का चाबहार पोर्ट था।
ईरान और इजरायल के बीच 13 से 24 जून तक हुए सैन्य संघर्ष में दोनों पक्षों को जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। इजरायल के तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों में ईरानी मिसाइलों ने तबाही मचाई तो इजरायली सेना के हमलों में ईरान की राजधानी तेहरान में कई इमारतें खंडहर में बदल गई हैं। दोनों देशों के बीच 12 दिन तक चला ये युद्ध भारत की चिंता भी बढ़ा रहा था क्योंकि दोनों ही देशों में उसका निवेश है। ऐसे में भारत के तेहरान और तेल अवीव से संबंध उसके काम आए और वह चाबहार और हाइफा पोर्ट पर अपने निवेश की सुरक्षा में कामयाब रहा।
भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में करीब 550 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इजरायल के हाइफा बंदरगाह में भी भारत की हिस्सेदारी है। इसके अलावा दोनों ही देशों में भारतीय नागरिक भी बड़ी संख्या में काम करते हैं। ईरान-इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद भारत के सामने एक तरफ अपना निवेश बचाने की चुनौती थी तो अपने नागरिकों की सुरक्षा की भी फिक्र थी क्योंकि दोनों ओर से मिसाइलों और बमों की बरसात हो रही थी। खासतौर से हाइफा और चाबहार को लेकर भारत फिक्रमंद था क्योंकि इस युद्ध की आंच इससे आगे पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट तक पहुंचने लगी थी।
दोनों पक्षों से संपर्क में रहा भारत – भारत ने जंग शुरू होने के बाद ऑपरेशन सिंधु के तहत ईरान और इजरायल से 4,415 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला। ईरान ने इस दौरान भारत के साथ पुराने संबंधों का ख्याल करते हुए अपनी ओर से जरूरी समर्थन दिया। दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास ने अपने बयान में भारत की सरकार और आम नागरिकों का धन्यवाद दिया। दूतावास ने कहा कि मुश्किल वक्त में भारत के लोग तेहरान के साथ मजबूती से खड़े रहे।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस युद्ध के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। मोदी ने इस दौरान भारत की चिंताओं को साझा किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की जल्द बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया। दूसरी ओर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बात कर हालात को जाना।
चाबहार पर नहीं हुए हमले – भारत के दोनों पक्षों से संपर्क बनाए रखने का असर ये हुआ कि हमलों में चाबहार बंदरगाह को सीधे निशाना नहीं बनाया गया। इससे बंदरगाह का ऑपरेशन और भारत का निवेश सुरक्षित रहा। दूसरी ओर चाबहार बंदरगाह से 170 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को युद्ध के दौरान बंद करना पड़ा। पाकिस्तान को बलूचिस्तान प्रांत में ईरान के साथ बॉर्डर भी बंद करना पड़ा। दूसरी ओर हाइफा शहर में ईरान के मिसाइल हमले हुए लेकिन इसके बंदरगाह को सीधेतौर पर अटैक नहीं किया गया।
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