
ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमले के दो हफ्ते हुए हैं। दो हफ्ते में अमेरिका और इजरायल मिलकर भी ईरान को हथियार डालने पर मजबूर नहीं कर पाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े-बड़े दावे जरूर कर रहे हैं, लेकिन खाड़ी में अपने सहयोगी देशों को भी ईरानी हमले से नहीं बचा पा रहे हैं। उलटे ईरान की होर्मुज स्ट्रेट स्ट्रैटजी ने अमेरिका पर वैश्विक दबाव बढ़ा रखा है।
इन हालातों में अमेरिका ने अपनी हालिया विदेशी में जो यू-टर्न लिया है, उसपर ईरान ने उसपर इस युद्ध के दौरान का सबसे बड़ा जुबानी हमला बोला है और यहां तक कह दिया है कि वॉशिंगटन को भारत और अन्य देशों से गुहार लगाने की नौबत आ गई है।
ईरान युद्ध के दौरान ढीले पड़े डोनाल्ड ट्रंप के तेवर – दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर में जब से भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के दावे का खंडन किया, उन्होंने भारत के खिलाफ टैरिफ के नाम पर धमकाने वाला रवैया अपनाए रखा। यहां तक कि उन्होंने रूस से तेल खरीदने के नाम पर भारत पर ही सबसे ज्यादा टैरिफ लगा दिया। लेकिन, ईरान युद्ध के बीच अचानक ट्रंप के तेवर ढीले पड़ते दिखाई दिए हैं।
अमेरिका पर ईरान का बहुत बड़ा जुबानी हमला – ईरान युद्ध में अमेरिका की इसी स्थिति के बहाने ईरान ने वॉशिंगटन पर बहुत बड़ा तंज कसा है। भारत के प्रति बदले अमेरिकी स्टैंड की वजह से रूस को हो रहे फायदे वाली एक रिपोर्ट शेयर करते हुए ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार (14 मार्च, 2026) को एक्स पर एक पोस्ट लिखा है-
अमेरिका ने रूस से तेल आयात बंद करने के लिए भारत को धमकाने में महीनों लगा दिए। ईरान से दो हफ्तों की जंग के बाद व्हाइट हाउस अब भारत समेत दुनिया से रूसी कच्चा तेल खरीदने की भीख मांग रहा है। यूरोप को लगा था कि ईरान के खिलाफ गैर-कानूनी युद्ध में साथ देने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिल जाएगा। दयनीय।
पश्चिम एशिया में युद्ध से रूस को हो रहा फायदा – ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने जिस फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट शेयर की है, उसमें बताया गया है कि रूसी तेल पर बदली अमेरिकी नीति से रूस को रोजाना 15 करोड़ डॉलर का मुनाफा हो रहा है।
ईरान संघर्ष की वजह से व्लादिमीर पुतिन के युद्ध का खजाना भर रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत और चीन से बिक्री में बढ़ोतरी हुई है।
खाड़ी देशों को युद्ध की वजह से हो रहे नुकसान का फायदा रूस को मिल रहा है।
तेल टैंकरों पर हमले ने कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है।
भारत के रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी यू-टर्न – ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी है।
रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में पिछले साल काफी कड़वाहट आई।
अमेरिका ने भारत से होने वाले आयात पर 25% टैरिफ के अलावा जो 25% टैरिफ लगाया था, वह इसी के लिए जुर्माने की तरह था।
अब अमेरिका से भी ऐसी रिपोर्ट है कि ट्रंप ने ईरान पर जो हमला किया, उसमें शायद होर्मुज स्ट्रेट में उसकी सामरिक मजबूती को आंकने में बहुत बड़ी चूक हो गई।
होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से दुनिया भर का लगभग 25% कच्चा तेल,गैस और अन्य पेट्रोलियम पदार्थ गुजरता है।
ईरान युद्ध शुरू होने से पहले तक भारत का 45% तेल और गैस का आयात इसी रास्ते हो रहा था।
अब युद्ध के लंबा खिंचने से पूरी दुनिया में इन चीजों की किल्लत बढ़ रही है, जिससे अमेरिकी प्रशासन वैश्विक दबाव में है।
भारत समेत कुछ अन्य देशों को रूस से 30 दिनों तक कच्चा तेल खरीदने की छूट अमेरिका को इसी मजबूरी में देनी पड़ी है।
Home / News / दो हफ्ते की जंग में ही अमेरिका को भारत से मांगनी पड़ी ‘भीख’, ईरान के तंज की बैकग्राउंड स्टोरी समझिए
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