Wednesday , April 15 2026 5:09 AM
Home / News / बंगाल में चुनाव से पहले ED का बड़ा एक्शन, कोयला घोटाला मामले में आई-पैक के निदेशक को किया गिरफ्तार

बंगाल में चुनाव से पहले ED का बड़ा एक्शन, कोयला घोटाला मामले में आई-पैक के निदेशक को किया गिरफ्तार


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में कोयले के कथित अवैध खनन और परिवहन से जुड़े एक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पीएसी के निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है। पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले यह ईडी की बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल में ईडी का एक्शन – नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में कथित कोयला घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल को सोमवार को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चंदेल को दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था।
दिल्ली में चंदेल के परिसर के अलावा, बेंगलुरु में आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक और निदेशक ऋषि राज सिंह के परिसर और मुंबई में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर के परिसर पर दो अप्रैल को ईडी द्वारा छापा मारा गया था।
ईडी ने 8 जनवरी को आई-पैक के दफ्तर पर छापेमारी की थी – ईडी ने आठ जनवरी को इस मामले में कार्रवाई करते हुए आई-पैक के कार्यालय और इसके संस्थापक व निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी की। मामले में तब विवाद शुरू हो गया था जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गईं।
ईडी का यह मामला सीबीआई की एफआईआर पर आधारित – ईडी का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की नवंबर 2020 की प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें पश्चिम बंगाल के आसनसोल और उसके आसपास के कुनुस्तोरिया और काजोरा क्षेत्रों में स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से संबंधित कई करोड़ रुपये के कोयला चोरी घोटाले का आरोप लगाया गया है।
इससे पहले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से भी हुई थी पूछताछ – इससे पहले एजेंसी ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की थी, जिसमें उन पर अवैध खनन से प्राप्त धन का लाभार्थी होने का आरोप लगाया गया था।
जनवरी में आई-पीएसी ने एक बयान में कहा था कि उसकी भूमिका केवल पारदर्शी, पेशेवर राजनीतिक परामर्श तक सीमित है, जो किसी भी राजनीतिक विचारधारा के प्रभाव से मुक्त है।