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मर्लिन मुनरो का अंतिम घर, एंट्री पर लिखा- यात्रा का अंत, एक्ट्रेस की डेथ और मकान नंबर 12305 के रहस्य

हॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेस रहीं मर्लिन मुनरो के उस घर को लेकर एक बार फिर से चर्चा सुरू है, जिसमें उन्होंने अपना आखिरी वक्त बिताया। बताया जाता है कि 36 साल की उम्र में गुजर चुकीं मुनरो को लेकर आज भी लोग उस घर में उनकी डेथ के रहस्य को खोजते हैं।
हॉलीवुड की गुजरे जमाने की हसीन एक्ट्रेस रहीं मर्लिन मुनरो की महज 36 वर्ष की उम्र में हुई असमय मृत्यु लंबे समय से रहस्य और चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी मौत को लेकर कई तरह की कहानियां और अटकलें दशकों से चर्चा में रही हैं।
मुनरो अपने अंतिम घर में केवल छह महीने रहीं, लेकिन जिस घर में उनकी मृत्यु हुई, वह अब फैन्स के लिए एक अट्रैक्शन जैसा बन गया है। यह स्थिति वैसी ही है जैसी लॉस एंजिलिस स्थित उनके मॉन्यूमेंट वेस्टवुड विलेज मेमोरियल पार्क की है।
इस आकर्षण घर का व्यावहारिक असर भी देखने को मिला है। इस वर्ष घर के मौजूदा मालिकों ने ‘सिटी ऑफ लॉस एंजिलिस’ के खिलाफ मुकदमा दायर किया। उनका आरोप है कि 2024 में इस संपत्ति को हिस्टोरिकल कल्चरल मॉन्यूमेंट (ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्मारक) घोषित किए जाने से वे मकान को गिराकर वहां इसे रीडेवलप नहीं कर पा रहे हैं।
यह घर टूरिज्म के अट्रैक्शन का केंद्र – शहर प्रशासन का कहना है कि संपत्ति के मालिकों को पहले से जानकारी थी कि यह घर टूरिज्म के अट्रैक्शन का केंद्र है और भविष्य में इसे हेरिटेज साइट का दर्जा मिल सकता है। प्रशासन का मानना है कि, मुनरो की पहचान हमेशा इस घर से जुड़ी रहेगी। लेखक ने अपने हालिया रिसर्ट में यह समझने की कोशिश की है कि ‘फिफ्थ हेलेना’ नामक यह घर मुनरो के लिए उनके जीवनकाल में क्या मायने रखता था। रिसर्ट में यह भी बताया गया कि घर की आर्किटेक्चरल मेमोरी, स्थान और उनसे जुड़ी कहानियों के सवालों को कैसे जन्म देती है।
मकान का नंबर 12305, रहने के लिए रिहायशी इलाका – मुनरो का जन्म 1926 में लॉस एंजिलिस में हुआ था और उनका बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता। जिस मकान का नंबर 12305 था, उसका निर्माण तीन वर्ष बाद ब्रेंटवुड इलाके में हुआ, जो उस समय रहने के लिए रिहायशी इलाका माना जाता था।
2,000 स्क्वायरफुट में बने इस घर का लुक साधारण था – करीब 2,000 स्क्वायरफुट में बने इस घर का लुक साधारण था, लेकिन इसका स्पैनिश-औपनिवेशिक शैली का डिजाइन अपने भीतर इतिहास की जटिल परतें समेटे हुए था। लाल टाइलों की छत, सफेद प्लास्टर की दीवारें और मेहराबदार खिड़कियां उस दौर की आर्किटेक्चरल स्टाइल का हिस्सा थीं, जो कैलिफोर्निया के औपनिवेशिक अतीत को रोमांटिक रूप में पेश करती थीं।
मुनरो ने इसे ‘एक असली छोटा मेक्सिकन घर’ बताया था – आर्किटेक्चरल इतिहासकारों के मुताबिक, 19वीं शताब्दी के अंत से लेकर 1930 के दशक तक लोकप्रिय रही ‘रिवाइवल आर्किटेक्चर’ने स्पैनिश औपनिवेशिक विरासत को महिमामंडित किया, जबकि मूल निवासियों पर हुए अत्याचारों की अनदेखी की गई। हालांकि बाद के वर्षों में पॉप्युलर कल्चरल और टूरिज्म इंडस्ट्री ने मेक्सिको को एक आकर्षक और रोमांचकारी सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में पेश किया। 1962 में यह घर खरीदने के बाद मुनरो ने इसे ‘एक असली छोटा मेक्सिकन घर’ बताया था।
उम्मीदों और संभावनाओं का घर – जहां बाद के वर्षों में इस घर को मुनरो के दुखद अंतिम दिनों के प्रतीक के रूप में देखा गया, वहीं स्वयं मुनरो इसे संभावनाओं और सुकून की जगह मानती थीं। उन्होंने अपने करीबी लोगों से बातचीत और पत्रों में घर की प्राइवेसी, मजबूत दीवारों, सुरक्षित खिड़कियों और स्विमिंग पूल के आसपास के छोटे लेकिन आरामदायक प्रिमाइस की तारीफ की थी। घर को सजाने के लिए वह मेक्सिको से सामान भी लाई थीं।
लैटिन में ‘कुर्सुम पर्फिसियो’ लिखा था यानी ‘यात्रा का अंत’ – मुनरो इस घर को अपने उन दोस्तों के लिए सेफ ठिकाने के रूप में देखती थीं जो किसी परेशानी में हों। घर की एंट्री गेट पर लगी प्रसिद्ध टाइल, जिस पर लैटिन में ‘कुर्सुम पर्फिसियो’ यानी ‘यात्रा का अंत’ लिखा था, उन्हें आशा का प्रतीक लगती थी।
करीबी दोस्तों ने इसी घर को उदासी और अधूरेपन का प्रतीक बताया – हालांकि उनकी मृत्यु के बाद उनके कुछ करीबी दोस्तों ने इसी घर को उदासी और अधूरेपन का प्रतीक बताया। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि घर की सजावट उनके मनोचिकित्सक राल्फ ग्रीन्सन के घर जैसी थी, जिससे मुनरो की पर्सनल आइडेंटिटी पर सवाल उठाए गए। लेख में कहा गया है कि यह नजरिया मुनरो की अपनी पसंद और फैसले लेने की क्षमता को नजरअंदाज करता है। 1961 में वह सिंगर फ्रैंक सिनात्रा के एक आधुनिक शैली वाले घर में भी रह चुकी थीं। ऐसे में 12305 नंबर का यह घर चुनना उनके सोच-समझकर लिए गए सौंदर्यबोध का हिस्सा था।
‘मैं नहीं चाहती कि हर कोई ठीक-ठीक देखे कि मैं कहां रहती हूं’ – मुनरो ने अपने अंतिम इंटरव्यू की तैयारी के दौरान कहा था, ‘मैं नहीं चाहती कि हर कोई ठीक-ठीक देखे कि मैं कहां रहती हूं। मैं चाहती हूं कि मैं हर व्यक्ति की कल्पना का हिस्सा बनी रहूं।’ लेख में कहा गया है कि आज भी लोग उस घर में मुनरो की मृत्यु के रहस्य को खोजते हैं, जबकि शायद अधिक जरूरी सवाल ये है कि यदि वह जीवित रहतीं तो उस घर में उनका जीवन कैसा होता।