
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को उल्टी, थकान और चक्कर जैसे लक्षण होते हैं और रात में नींद पूरी नहीं हो पाती, इसके बावजूद उन्हें सुबह घर के सभी काम करने पड़ते हैं जिससे वे बुरी तरह टूट जाती हैं। ऐसी ही स्थिति से गुजर रही एक महिला ने डॉक्टर शैफाली दधीचि के सामने अपना दर्द साझा किया। महिला ने बताया कि उन्हें सुबह करीब 4 बजे ही थोड़ी देर के लिए नींद आती है, और फिर 7 बजे उठकर पति के लिए टिफिन बनाना पड़ता है। इस पर डॉ. ने पति से कहा कि खुद टिफिन बना लें। मगर पति ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह ऐसा नहीं कर सकता। यह सुनकर गाइनेकोलॉजिस्ट नाराज हो गईं और उन्होंने कहा कि महिलाएं ही सब कुछ संभालें? आखिर कब बदलेगी यह पितृसत्तात्मक सोच?
मैम बात-बात पर रोने लगती है – डॉक्टर शैफाली दधीचि के पास एक कपल प्रेग्नेंसी के रूटीन चेकअप के लिए आता है।बातचीत के दौरान पति अपनी पत्नी से कहता है, ‘तुम क्यों रो रही हो? बात-बात पर रोने लगती हो, ऐसा नहीं होना चाहिए।’
रात भर नींद नहीं आती – कपल की बातचीत सुनने के बाद गाइनेकोलॉजिस्ट महिला से पूछती हैं, ‘क्या हुआ सुमन?’ इस पर महिला जवाब देती है, ‘मैम, मैं क्या करूं… पूरी रात नींद नहीं आती। सुबह करीब चार बजे जब आंख लगती है, तो फिर सात बजे उठकर इनके लिए टिफिन बनाना पड़ता है।’
‘मैम, मैं टिफिन नहीं बना सकता – यह सुनने के बाद एक्सपर्ट पति से कहती हैं, ‘अरे तो आप खुद अपना टिफिन बना लिया करो, थोड़ा हेल्प कर दो।’ यह सुनकर पति जवाब देता है, ‘मैडम क्या करूं, ज्वाइंट फैमिली में रहता हूं, मम्मी डांटती हैं।’ इस पर डॉक्टर थोड़ी गंभीर होकर कहती हैं, ‘मम्मी की डांटती यह बात आपको अच्छी तरह से समझ आ गई… लेकिन सवाल यह है कि हम कब तक ऐसे ही पैट्रियार्की (पितृसत्तात्मक सोच) के पुतले बने क्यों रहें?’
बीवी प्रेग्नेंट भी हो, घर भी संभाले – डॉ. दधीचि कहती हैं, ‘बीवी प्रेग्नेंट भी हो, बच्चा भी पैदा करे और घर की जिम्मेदारियां भी संभाले। उसकी हालत के बारे में भी थोड़ा सोचिए। सुबह उसे कितनी उल्टियां होती हैं… ये कोई नाटक नहीं कर रही हैं, ये असल में तकलीफ में है और रो रही है।’
प्रेग्नेंसी में महिलाओं को नहीं आती ठीक से नींद – असल में प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को रात में ठीक से नींद नहीं आती और सुबह उठते ही उल्टी या मिचली जैसा महसूस होता है। इसके बावजूद कई महिलाएं एक तरफ उल्टी भी करती हैं और दूसरी तरफ खाना भी बनाती रहती हैं। पुराने जमाने में तो लोग ऐसा करते थे, मान ली आप लोगों की बात।
जैसे बदल रहा है समाज – लेकिन जिस तरह बाकी चीजें बदल रही हैं, उसी तरह इस सोच को भी बदलने की जरूरत है। यह समझना जरूरी है कि पति को पत्नी को सपोर्ट करना चाहिए, वह घर के कामों में हाथ बटाएं, ताकि महिला की प्रेग्नेंसी की जर्नी इतनी परेशानियों में आसानी से गुजरे।
पति बराबरी से जिम्मेदारी निभाएं – बाद में जब बच्चा इस दुनिया में आए, तो उसे पालने में भी पति बराबरी से जिम्मेदारी निभाएं, ताकि महिला डिप्रेशन में न जाए। उसकी सेहत बेहतर रहे और वह अपने खान-पान का सही ध्यान रख सके। तभी तो रहेगी हेप्पी फैमिली और खुशहाल फैमिली।
पितृसत्तात्मक सोच को करें खत्म – वह अंत में कहती हैं, ‘मेरी सभी लोगों से गुजारिश है कि प्लीज इस पितृसत्तात्मक सोच को खत्म कीजिए, जिसमें यह मान लिया जाता है कि महिलाएं ही बच्चा पैदा करेंगी और घर भी संभालेंगी। पतियों को बराबरी से उनका सपोर्ट करना चाहिए। यह कोई सिर्फ उनकी ‘चॉइस’ नहीं होनी चाहिए, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।’
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