
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बिगड़ते रिश्तों के बीच, दिल्ली और मॉस्को इस क्षेत्र में चरमपंथ और सीमा पार से होने वाले आतंकी खतरों से निपटने के लिए अपनी रणनीतियों में तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, वे तालिबान को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद देने पर भी विचार कर रहे हैं।
सीमा पार से आतंकी खतरों पर चर्चा — हालांकि दोनों पक्षों ने बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है कि इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सीमा पार से होने वाले आतंकी खतरों, यूरेशिया पर इसके संभावित असर और अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच बिगड़ते रिश्तों को लेकर अपनी-अपनी रणनीतियों में तालमेल बिठाने पर चर्चा की।
रूस ने सबसे पहले तालिबान सरकार को मान्यता दी – रूस पहला ऐसा देश है जिसने तालिबान सरकार को आधिकारिक तौर पर पूरी राजनयिक मान्यता दी है, उनके साथ औपचारिक द्विपक्षीय संबंध स्थापित किए हैं और एक रक्षा समझौता भी किया है।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान की स्थिति पर भारत से चर्चा – इस बीच, रूस के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने अपने भारतीय समकक्ष से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान-पाकिस्तान की स्थिति और पाकिस्तान की ओर से होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर चर्चा की।
आतंकवाद का शिकार भारत, पाकिस्तान की हरकत – बता दें कि भारत वर्षों से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ और देश भर में बम विस्फोटों व हत्याओं को अंजाम देने में मदद करने का आरोप लगाता रहा है।
भारत ने कई बार पाकिस्तान के सरकारी तत्वों की सक्रिय संलिप्तता के ठोस सबूत पेश किए हैं। पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे।
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