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भोजन के पहले और बाद शास्त्रों के अनुसार रखें कुछ बातों का ध्यान

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सनातन संस्कृति के शास्त्रों में सुखी जीवन से संबंधित बहुत सारी बातें बताई गई हैं। जिनका अनुसरण करने से महालाभ पाया जा सकता है। भोजन के पहले-भोजन के बाद शास्त्रों के अनुसार रखें कुछ बातों का ध्यान

* दोनों हाथ, दोनों पैर और मुख इन पांच अंगों को धोकर भोजन करना चाहिए। (हस्तपादे मुखे चैव…पद्यपुराण, सृष्टि, 51/88)

* गीले पैरों वाला होकर भोजन करें पर गीले पैर सोएं नहीं। गीले पैरों वाला होकर भोजन करने वाला मनुष्य लम्बी आयु को प्राप्त होता है। (आद्र्रपादस्तु भुंजीत…मनुस्मृति 4/76)

* सूखे पैर और अंधेरे में भोजन नहीं करना चाहिए। (शयनं चाद्र्रपादेन…पद्यपुराण, सृष्टि. 51/124)

* शास्त्र में मनुष्यों को प्रात: काल और सायंकाल दो ही समय भोजन करने का विधान है। बीच में भोजन करने की विधि नहीं देखी गई है। जो इस नियम को पालता है उसे उपवास करने का फल प्राप्त होता है। (सायं प्रातर्मनुष्याणामशनं…महाभारत, शांतिपर्व 193/10)

* संध्याकाल में भोजन नहीं करना चाहिए। (न संध्यायां भुंजीत …वसिष्ठ स्मृति 12/33)

* गृहस्थ को चाहिए कि पहले देवताओं, ऋषियों, मनुष्यों (अतिथियों), पितरों और घर के देवताओं का पूजन करके बाद में स्वयं भोजन करें। (देवानृषीन मनुष्यांश्च…महाभारत शांति..36/ 34-35

* भोजन सदा पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए। पूर्व की ओर मुख करके भोजन करने से आयु बढ़ती है, दक्षिण की ओर प्रेतत्व की प्राप्ति, पश्चिम की ओर रोगी और उत्तर की ओर मुख करके भोजन करने से आयु तथा धन की वृद्धि होती है। (भुंजीत नैवेहच दक्षिणामुखो… वामनपुराण… 14/51)

* भोजन सदा एकांत में करना चाहिए। (आहारनिर्हाविहारयोगा:… वसिष्ठस्मृति 6/9)

* एक ही वस्त्र पहन कर कभी भोजन न करें। (नान्नमद्यादेकवासा… मनु. 4/ 45)

* भोजन करने के बाद क्रोध नहीं करना चाहिए और न ही भोजन के तुरंत बाद व्यायाम करना चाहिए। रात्रि में दूध का सेवन अमृततुल्य माना गया है। (आयुर्वेद मान्यता)

अग्निवास जानकर करें होम!
जिस दिन को होम/ हवन करना हो, उस दिन की तिथि और वार की संख्या को जोड़कर 1 जमा करें। फिर कुल जोड़ को 4 द्वारा भाग दें। यदि शेष शून्य हो या 3 बचे तो अग्नि का वास पृथ्वी पर होगा। इस दिन होम करना कल्याणकारक होता है। यदि शेष 2 बचे तो अग्नि का वास पाताल में होता है। इस दिन होम करने से धन का नुक्सान होता है। यदि 4 का भाग देने से 1 शेष बचे तो आकाश में अग्नि का वास होता है। इसमें होम करने से आयु का क्षय होता है। वार की गणना रविवार से तथा तिथि की गणना शुक्ल प्रतिपदा से करनी चाहिए। तदोपरांत ग्रह के मुख आहुति चक्र का विचार करना चाहिए।

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