
नीदरलैंड और बेल्जियम ने दक्षिण इंग्लैंड में कोरोना वायरस के एक नए प्रकार (स्ट्रेन) का पता चलने के बाद ब्रिटेन से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है, जबकि जर्मनी उड़ानों की संख्या सीमित करने पर विचार कर रहा है ताकि इसका प्रकोप समूचे यूरोपीय महाद्वीप में नहीं फैले। बताया जा रहा है कि वायरस तेजी से फैल रहा है लेकिन यह ज्यादा घातक है, इसके सबूत नहीं मिले हैं।
वहीं, नीदरलैंड ने ब्रिटेन से आने-जाने वाली उड़ानों पर कम से कम इस साल के अंत तक रोक लगा दी है और बेल्जियम ने मध्यरात्रि से ब्रिटेन से आने-जाने वाली उड़ानों पर 24 घंटे के लिए रोक लगाई है। बेल्जियम ने ब्रिटेन को जोड़ने वाली रेल सेवा भी स्थगित कर दी है। जर्मनी के अधिकारियों ने बताया कि ब्रिटेन से आने वाले विमानों को लेकर वे ‘गंभीर विकल्पों’ पर विचार कर रहे हैं लेकिन अभी कोई फैसला नहीं किया है।
ब्रिटेन के कदम के चलते लिए गए फैसले : नीदरलैंड ने कहा कि वह ब्रिटेन से वायरस के इस नए स्ट्रेन को आने से रोकने के लिए यूरोपीय संघ के अन्य देशों के साथ विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा करेगा। यूरोपीय संघ के सदस्य तीनों देशों की सरकारों ने कहा कि वे ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के लंदन और आसपास के इलाकों के लिए शनिवार को उठाए गए सख्त कदम के मद्देनजर यह फैसला कर रही हैं।
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने बताया है कि इन दोनों को वैक्सीन के कारण एलर्जिक रिएक्शन हुआ है। ऐसे में ब्रिटिश स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ऐसे लोग जिन्हें किसी दवा, खाना या वैक्सीन से एलर्जी है वह फाइजर की कोरोना वैक्सीन का टीका न लगवाएं। ब्रिटेन के मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) ने सभी 50 एनएचएस ट्रस्टों को एहतियाती सलाह दी है कि जिस भी व्यक्ति को एलर्जी हो उन्हें यह वैक्सीन न दी जाए।
ब्रिटिश मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी के अनुसार, ब्रिटेन में गंभीर एलर्जी का इतिहास रखने वाले लोगों की सही संख्या का कोई आंकड़ा नहीं है। माना जा रहा है कि इस देश में लगभग 70 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें भोजन, दवा या वैक्सीन से एलर्जी हो सकती है। ऐसे में अगर इन लोगों को फाइजर की वैक्सीन लगाई जाती है तो उसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
इंग्लैंड में एनएचएस के राष्ट्रीय चिकित्सा निदेशक प्रोफेसर स्टीफन पॉविस ने कहा कि यह सलाह एहतियाती आधार पर दी गई है। इससे किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। जिन दो लोगों के ऊपर इस वैक्सीन का उल्टा असर पड़ा है वे भी ठीक हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये दोनों ही स्वास्थ्यकर्मी Anaphylactoid Reactions के शिकार हुए थे।
दो लोगों को फाइजर की वैक्सीन से एलर्जी होने के बावजूद ब्रिटिश सरकार प्रतिदिन 5000 से 7000 लोगों को टीका लगा रही है। फाइजर कोरोना वैक्सीन की 8 लाख से ज्यादा डोज को पूरे ब्रिटेन के अस्पतालों में पहुंचा दिया गया है। फाइजर के एक प्रवक्ता ने कहा कि हमें COVID-19 BNT162b2 वैक्सीन के कारण दो लोगों में एलर्जी होने की रिपोर्ट मिली है। इस मामले को लेकर फाइजर और बायोएनटेक जांच में एमएचआरए का साथ दे रहे हैं।
फाइजर कंपनी की भारतीय इकाई ने भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) से फाइजर/बायोनटेक वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की अनुमति मांगी है। ब्रिटेन में टीके को मंजूरी मिलने के बाद फाइजर और बायोनटेक को आगामी दिनों में अन्य देशों में भी इस टीके को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। भारत में ऐसा कोई भी सरकारी आंकड़ा नहीं है जिससे पता चल पाए कि कौन से मरीज में पहले एलर्जी के मामले सामने आए हैं। ऐसे में अगर किसी ऐसे व्यक्ति को वैक्सीन दिया जाता है जिसमें एलर्जी की संभावना ज्यादा है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
‘तेजी से फैल रहा नया स्ट्रेन’ : इससे पहले जॉनसन ने श्रेणी-4 के सख्त प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से लागू करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कोरोना वायरस का एक नया स्ट्रेन सामने आया है, जो पूर्व के वायरस के मुकाबले 70 प्रतिशत अधिक तेजी से फैलता है और लंदन और दक्षिण इंग्लैंड में तेजी से संक्रमण फैला सकता है। संक्रमण की दर बढ़ने को लेकर रविवार से सख्त पाबंदियों के साथ लॉकडाउन लागू किया गया था जिसके चलते लाखों लोग घरों के अंदर ही रहने को मजबूर हो गए हैं। गैर-जरूरी वस्तुओं की दुकानें और प्रतिष्ठान भी बंद कर दिए गए हैं।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री अलेक्सेंडर डी क्रू ने रविवार को कहा कि वह एहतियातन 24 घंटे का उड़ान प्रतिबंध आदेश जारी कर रहे हैं ,जो मध्यरात्रि से प्रभावी होगा। उन्होंने कहा, ‘वायरस के इस नए प्रकार को लेकर कई सवाल हैं।’ हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि मंगलवार को स्थिति और स्पष्ट होगी।
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