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China Taiwan Tension: चीन ने पहली बार बताया- ताइवानी वायुसीमा में क्यों भेजता है लड़ाकू विमान? छिपी है खूनी चाल

ताइवान और अमेरिका के बीच गहराते रक्षा संबंधों से चिढ़े चीन ने साउथ चाइना सी में अपने सैन्य अभियानों की तादाद को बढ़ा दिया है। लगभग हर दिन चीन के लड़ाकू विमान जानबूझकर ताइवानी वायुसीमा में घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही चीन के रिकॉर्ड 25 लड़ाकू विमानों ने एक साथ ताइवानी एयर आइडेंटिफिकेशन जोन का उल्लंघन किया था। ऐसा पहली बार हुआ है जब ड्रैगन का मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने बताया है कि आखिर चीनी लड़ाकू विमान ताइवानी एयरस्पेस में बार-बार घुसपैठ क्यों करते हैं।
ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने बताया कारण : ग्लोबल टाइम्स के चीफ एडिटर हू शीजिन ने बताया कि चीन का सैन्य अभियान दरअसल अमेरिकी विदेश विभाग और ताइवान के बीच संबंधों की गाइडलाइन का उल्लंघन के जवाब में किया जा रहा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ताइवान और अमेरिका के बीच गहराते संबंधों को देखते हुए इलाके में सैन्य दबाव को और बढ़ाएगी। अगर ताइवान हमारे जहाजों पर फायरिंग करता है तो इसे पूर्ण युद्ध माना जाएगा और पूरा का पूरा ताइवाान स्ट्रेट हमारा होगा।
ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा बताता है चीन : चीन की कम्युनिस्ट पार्टी गृह युद्ध के खत्म होने के सात दशक बाद भी ताइवान को अपनी जमीन का हिस्सा बताता है। यह बात अलग है कि ताइवान पर आजतक चीन का प्रत्यक्ष रूप से कभी शासन नहीं रहा है। चीनी सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारी कई बार ताइवान के ऊपर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। पिछले साल के अंत में चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने यहां तक कहा था कि ताइवान की स्वतंत्रता का अर्थ ही जंग का ऐलान होगा।
ताइवान पहुंचा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल : चीन की धमकियों के बावजूद जो बाइडन ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को ताइवान के तीन दिवसीय दौरे पर भेजा है। कल ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात भी की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व अमेरिकी सीनेटर क्रिस डोड और पूर्व उप सचिव रिचर्ड आर्मिटेज के साथ जेम्स स्टाइनबर्ग भी शामिल हैं। इन नेताओं को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का खास समझा जाता है। बताया जा रहा है कि जो बाइडन ने इन नेताओं को ताइवान के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धताओं को प्रदर्शित करने के लिए भेजा गया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने चीन को दी थी चेतावनी : अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने ताइवान पर हमला करने की सोचने को लेकर चीन को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि चीन की आक्रामक कार्रवाई हमारे लिए वास्तविक चिंता का विषय है। ब्लिंकेन ने जोर देकर कहा कि ताइवान के पास चीन को जबाव देने के लिए पूरी क्षमता मौजूद है। अमेरिका भी पश्चिमी प्रशांत में शांति और सुरक्षा कायम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ताइवान की इन मिसाइलों से डरती है चीनी सेना, हमले की नहीं हुई हिम्मत : साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के पास इतनी ज्यादा मिसाइलें मौजूद हैं जो क्षेत्रफल के हिसाब से दुनियाभर में सबसे ज्यादा है। हालांकि ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने इन मिसाइलों की कुल संख्या को आजतक जारी नहीं किया है। ताइपे की चाइना टाइम्स अखबार के अनुसार, ताइवान के पास कुल 6000 से अधिक मिसाइलें हैं।
इन हथियारों में अमेरिका निर्मित मिसाइलों के अलावा ताइवान की स्वदेशी मिसाइलें भी शामिल हैं। जिसमें हवा से हवा, हवा से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें शामिल हैं। ताइवान के पास मिसाइल ही ऐसा हथियार है जिससे चीनी सेना खौफ खाती है और आजतक हमले के प्लान को अंजाम नहीं दे सकी है। क्योंकि, चीन के राष्ट्रपति से लेकर चीनी सेना के जनरल तक लगातार ताइवान पर हमले की धमकी देते रहे हैं।
अमेरिका की पैट्रियॉट एडवांस्ड कैपेबिलिटी – 3 (PAC-3) मिसाइस दुनिया की सबसे बेहतरीन डिफेंस सिस्टम में से एक है। यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और लड़ाकू जहाजों को पल भर में मार गिराने में सक्षम है। सभी मौसम में दागे जाने वाली इस मिसाइल का निर्माण लॉकहिड मॉर्टिन ने किया है। यह मिसाइल इस समय पूरे अमेरिका, जर्मनी, ग्रीस, इजरायल, जापान, कुवैत, नीदरलैंड, सऊदी अरब, कोरिया, पोलैंड, स्वीडन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, रोमानिया, स्पेन और ताइवान की सेना में शामिल है।
अमेरिका की ऑटोमेटिक सतह से हवा में मार करने वाला यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम क्रूज मिसाइलों, ड्रोन, फिक्स विंग हवाई जहाज और हेलिकॉप्टरों के खिलाफ घातक कार्रवाई कर सकता है। इसका रडार दुश्मन के किसी भी प्रकार के हवाई हमले को रोकने में पूरी तरह सक्षम है।
ये तीनों मिसाइल ताइवान की सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हार्पून एंटी शिप मिसाइल है जिसे मैक्डोनाल्ड डगलस ने बनाया है। यह जमीन से किसी भी शिप को निशाना बनाने में सक्षम है। स्ट्रिंगर मिसाइल मैन पोर्टेबल है जो जमीन से हवा में किसी भी हेलिकॉप्टर या ड्रोन को मार गिरा सकती है। जबकि AIM-9 Sidewinder शॉर्ट रेंज एयर टू एयर मिसाइल है जो दुश्मन के जहाजों और हेलिकॉप्टरों का काल बन सकती है।
Hsiung Feng 1 और 2 ताइवान में नेशनल चुंग-शान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम है। जो समुद्र में दुश्मन के नेवल शिप को आसानी से निशाना बना सकती है। जबकि Hsiung Feng 3 एक मध्यम दूरी की सुपरसोनिक मिसाइल है जो जमीन और पानी दोनों जगह दुश्मनों पर प्रभावी कार्रवाई कर सकती है।
वान चिएन यह एयर-टू-ग्राउंड क्रूज़ मिसाइल है जिसे ताइवान ने खुद विकसित किया है। ऐसा माना जाता है कि यह मिसाइल 200 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को आसानी से भेद सकती है। जबकि टीएन कुंग 1-3 ताइवान द्वारा विकसित सतह से हवा में मार करने वाली एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल और एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम है। टीएन कुंग 3 45 से 70 किलोमीटर तक चीनी गाइडेड मिसाइलों को रोक सकता है। इनके अलावा भी ताइवान के पास कई अन्य मिसाइलें भी हैं।
चीन ने भेजे थे 25 लड़ाकू विमान : अमेरिकी राजनयिकों की यात्रा के दो दिन पहले ही चीन ने ताइवानी एयरस्पेस में एक साथ 25 लड़ाकू विमानों की घुसपैठ करवाई थी। यह ताइवानी एयरस्पेस में चीनी वायु सेना की अबतक की सबसे बड़ी घुसपैठ है। हालांकि, हरकत में आई ताइवानी वायुसेना की चेतावनी के बाद चीनी लड़ाकू विमान भाग खड़े हुए। इससे पहले 27 मार्च को चीनी वायुसेना के 20 लड़ाकू विमानों ने एक साथ ताइवानी वायुसीमा में घुसपैठ की थी।