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Coronavirus पर तनाव के बीच चीन के PM की US को चेतावनी, पूरी दुनिया को नुकसान होगा


China के PM Li Keqiang ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि Coronavirus को लेकर तनाव के बीच दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी, तो किसी को भला नहीं होगा बल्कि पूरी दुनिया को नुकसान होगा।
कोरोना वायरस को लेकर चीन और अमेरिका के बीच में तनाव जारी है। इसी बीच चीन के प्रधानमंत्री ली किकियांग ने कहा है कि दोनों देशों को अपनी असहमतियों को दूर करना चाहिए और एक-दूसरे के ‘मुख्य हितों’ का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी कि दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पटरी से उतारने के प्रयास से किसी का भी भला नहीं होगा और पूरी दुनिया को नुकसान होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि घातक वायरस के स्रोत पर स्पष्ट विचार होना जरूरी है क्योंकि वह विज्ञान के आधार पर इसका पता लगाने के प्रयासों का समर्थन करते हैं। व्यापार, कोरोना वायरस महामारी की उत्पत्ति, हॉन्ग-कॉन्ग में नए सुरक्षा कानून को लेकर चीन की कार्रवाई और विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक सैन्य रवैये को लेकर अमेरिका की चीन के साथ तनातनी चल रही है।
ट्रंप ने दी थी चेतावनी
चीन के संसद सत्र के अंत में ली ने वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ते तनाव के बारे में सवालों का जवाब दिया। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि वह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंध तोड़ देंगे। चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बाद ली दूसरे नंबर के नेता हैं। ली ने कहा, ‘यह सच है कि वर्तमान में चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में नयी समस्याएं और चुनौतियां आ गई हैं।’
​भारत से तीन गुना है रक्षा बजट
अभी 26 मई को ही चीन का रक्षा बजट आया है। इस साल इसे 179 बिलियन डॉलर रखा गया है, इसके पीछे देश के सामने खड़ी चुनौतियों को बताया गया है। पिछले साल के मुकाबले में इसे 6.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। भारत की बात करें तो हमारा रक्षा बजट साल 2020 के लिए 66.9 बिलियन डॉलर है। चीन का ताजा बजट इसका 2.7 गुना ज्यादा है।
किसके पास कितनी सेना
चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी में फिलहाल 22 लाख सक्रिय कर्मचारी हैं, जबकि भारत में यह संख्या 15 लाख है।
परमाणु हथियारों की संख्या में चीन आगे
चीन के पास कुल 260 परमाणु हथियार है तो दूसरी तरफ भारत के पास सिर्फ 110 परमाणु हथियार हैं।
​दोनों एक दूसरे की मिसाइल रेंज की जद में
अगर युद्ध मिसाइलों का होता है तो भारत और चीन एक दूसरे की जद में हैं। भारत के पास 5 हजार किलोमीटर तक मार करनेवाली अग्नि-5 मिसाइल है। चीन का ज्यादातर हिस्सा इसकी रेंज में है। वहीं चीन के पास DF-41 मिसाइल है। 2019 में दिखाई गई इस मिसाइल के साथ दावा किया गया था कि यह 30 मिनट में अमेरिका पर हमला कर सकती है। इसकी रेंज 9,320 किलोमीटर है। इसे न्यूक्लियर हथियार ले जाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
एयरक्राफ्ट के मामलों में चीन आगे
विमानों की संख्या में चीन फिलहाल हमसे आगे है। इसके पास 3,210 विमान हैं। वहीं भारत के पास 2,123 विमान। लड़ाकू विमानों की बात करें तो यह भारत के पास 538 हैं, वहीं चीन के पास 1,232 हैं। हेलिकॉप्टर भारत के पास कुल 722 वहीं चीन के पास 911 हैं।
चीन से सटे बॉर्डर पर कितना तैयार भारत
चीन के सीमावर्ती इलाके में भारत के पास 15 इनफैंटरी डिविजन (हर डिविजन में 12 हजार से ज्यादा सैनिक) हैं। इसके साथ ही तोपखाने, मिसाइलें, टैंक और एयर डिफेंस रेजिमेंट भी हैं।
राफेल के आने से मजबूत होगा भारत
भारत ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमान का सौदा किया है। इनमें से चार जुलाई के आखिर तक भारत आ सकते हैं। इनका आना भारत को मजबूती देगा। फिछले दिनों LAC पर चीनी हेलिकॉप्टर उड़ते देखे गए थे। इसके साथ ही खबर है कि चीन ने लद्दाख के पास एयरबेस बनाकर फाइटर जेट वहां खड़े किए हैं।
पूरी दुनिया का नुकसान
उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंध कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, ‘चीन-अमेरिका के बीच संबंधों को ठीक करना दोनों देशों और पूरी दुनिया के लोगों के हित में है।’ ली ने कहा, ‘हमारे आर्थिक व्यवसाय ने लंबा सफर तय किया है और इससे दोनों पक्षों को काफी लाभ पहुंचा है।’ उन्होंने कहा कि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। दोनों देशों के बीच शीत युद्ध जैसी स्थिति पैदा होने और अर्थव्यवस्था को पटरी से उतारने की चेतावनी पर ली ने कहा, ‘हमने शीत युद्ध की मानसिकता को छोड़ दिया है और दोनों बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच संबंध तोड़ने से किसी पक्ष का भला नहीं होगा और पूरी दुनिया को नुकसान होगा।’
बाजार पर छोड़ें उसके फैसले
चीन में अमेरिकी कंपनियों द्वारा व्यापक निवेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णय बाजार और व्यवसाय पर छोड़ दिया जाना चाहिए और इसमें सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक व्यवस्था और ऐतहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह काफी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध है। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्य हैं। कई क्षेत्रों में दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ काम करना चाहिए और कर सकते हैं।’