
इस्लामाबाद शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स नेवी को होर्मुज में नाकाबंदी के आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि प्रवेश करने या उससे बाहर निकलने वाले सभी जहाजों को रोका जाए। ट्रंप का यह कदम हैरान करने वाला है, क्योंकि पहले वह ईरान द्वारा होर्मुज को ब्लॉक करने का विरोध कर रहे थे। अब वह ईरान जैसा ही कदम उठा रहे हैं।
ट्रंप के इस आदेश के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) की ओर से चेतावनी जारी की गई है। सेंटकॉम ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को टारगेट करेगी, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बंदरगाह भी शामिल हैं। सेंटकॉम ने स्पष्ट किया है कि इस नाकेबंदी की जद में सभी देश आएंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना द्वारा यह नाकाबंदी शुरू कर दी गई है।
भारत की बढ़ सकती है दिक्कतें – अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद ईरान द्वारा होर्मुज को ब्लॉक किए जाने से वैश्विक स्तर पर तेल और एलपीजी की सप्लाई काफी प्रभावित हुई है। होर्मुज के रास्ते से ही दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती है, जबकि इस रास्ते से भारत के 80 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में ट्रंप के चौंकाने वाले इस फैसले की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।
भारत पर इस नाकाबंदी का क्या होगा असर? – भारत कच्चा तेल आयात करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है, नई दिल्ली अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत तेल आयात करता है। इस तेल की अधिकतम सप्लाई खाड़ी देशों से होर्मुज के रास्ते होती है। ईरान की नाकाबंदी के कारण भारत की तेल आपूर्ति में काफी दिक्कतें आईं। हालांकि दशकों पुराने संबंधों के कारण ईरान ने भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दे दी।
अमेरिका द्वारा होर्मुज की नाकाबंदी करने का सबसे बड़ा कारण ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह करना है। भारत उन देशों में है, जिसे ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भी तेहरान द्वारा तेल आपूर्ति जारी रही। वहीं चीन ईरान से तेल आयात करने के मामले में पहले नंबर पर है। अब ऐसे में देखना होगा कि अमेरिका चीनी तेल टैंकरों को रोकता है या नहीं।
होर्मुज ट्रैफिक में कोई भी लंबे समय तक रुकावट तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर असर डाल सकती है, जिसका असर महंगाई और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
होर्मुज ब्लॉकेज का असर अप्रत्यक्ष तौर पर फर्टिलाइजर, केमिकल्स, कंज्यूमर गुड्स की सप्लाई पर दिखेगा।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अच्छी बात यह है की भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से अधिक तेल खरीद रहा है।
गौरतलबहै कि होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिससे भारत समेत ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए कोई भी रुकावट एक बड़ी चिंता बन जाती है।
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