
5 फरवरी, मंगलवार से माघ मास के गुप्त नवरात्रि आरंभ हो रहे हैं जो 14 फरवरी, गुरुवार को समाप्त होंगे। कई वर्षों बाद नवरात्रि मंगलवार से आरंभ हो रहे हैं। मां दुर्गा शुक्ल पक्ष में जागृत होंगी, प्रयागराज में अर्ध कुंभ का स्नान भी चल रहा है। चंद्रमा वर्तमान समय में कुंभ राशि में हैं, जोकि एक शुभ योग है। मंगल का धनिष्ठा नक्षत्र होने से हर इच्छा पूरी करने का सुनहरा समय है। अधिकतर लोग तो चैत्र या वासंतिक नवरात्रि और आश्विन या शारदीय नवरात्रि के बारे में ही जानते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें साल में 2 बार गुप्त नवरात्रि आते हैं। पहले माघ शुक्ल पक्ष में और दूसरे आषाढ़ शुक्ल पक्ष में। चारों नवरात्रि ऋतु परिवर्तन के वक्त ही मनाए जाते हैं।
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना होती है तो गुप्त नवरात्र में देवी की दस महाविद्याओं की उपासना करने का विधान है। नवरात्रि में सात्विक और तांत्रिक पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में अधिकतर तांत्रिक पूजा का विधान है। जिसका प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता बल्कि गोपनीय रुप से मां का गुनगान किया जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र की बजाय गुप्त नवरात्र में देवी की साधाना अधिक कठिन होती है। इन नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। रात के समय की गई गुप्त पूजा गुप्त मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। व्यक्ति के पास धन-धान्य, ऐश्वर्या, सुख-स्मृद्धि और शांति की कोई कमी नहीं रहती। शुभ-लाभ के लिए 10 दिन तक रात को करें ये काम-
मां को लाल सिंदूर, लाल चुनरी अर्पित कर नारियल, केले, सेब, तिल के लडडू, बताशे का भोग लगाएं।
लाल गुलाब के फूल या माला चढ़ाएं, सरसों के तेल का दीपक लगाएं।
अब आसन पर बैठकर इन मंत्रों का जाप करें-
हर तरह का कल्याण चाहते हैं तो इस मंत्र का जाप करें-
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥
स्वास्थ्य एवं सफलता के लिए-
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥
बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्र प्राप्ति के लिए-
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥
तन और मन से सुंदर पत्नी के लिए-
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्ग संसारसागस्य कुलोद्भवाम्।।
गरीबी दूर करने के लिए-
दुर्गेस्मृता हरसि भतिमशेशजन्तो: स्वस्थैं: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दरिद्रयदुखभयहारिणी कात्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता।।
वैभव प्राप्ति एवं भय मुक्ति के लिए-
ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥
विपत्ति नाशक मंत्र-
शरणागतर्दिनार्त परित्राण पारायणे।
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥
शत्रुओं का नाश करने के लिए-
ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वाम् कीलय बुद्धिम्विनाशाय ह्रीं ॐ स्वाहा।।
सपने में कार्य-सिद्धि के लिए-
दुर्गे देवी नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके।
मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।
सर्व विघ्न नाशक मंत्र-
सर्वबाधा प्रशमनं त्रेलोक्यस्यखिलेशवरी।
एवमेय त्वया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्॥
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