खाड़ी देशों में अपनी ताकत को बढ़ाने की तैयारी में जुटे अमेरिका की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। ईरान ने अमेरिका के घोषित दुश्मन रूस और चीन के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का ऐलान किया है। अगर मध्य पूर्व में रूस और चीन अपनी सेना की निगहबानी बढ़ाते हैं तो यह अमेरिका के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है। मॉस्को में तैनाक ईरानी रातदूत ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका कितनी भी ताकत लगा ले, हमारे सैन्य संबंध रूस के साथ बने रहेंगे।
‘अमेरिकी प्रतिबंधों का नहीं पड़ेगा प्रभाव’ : ईरानी राजदूत काजम जलाली ने रूसी मीडिया स्पूतनिक को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों से उनके देश की सैन्य क्षमताओं और वैज्ञानिक अनुसंधान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का यह व्यवहार भविष्य में भी ऐसे ही जारी रहेगा, क्योंकि अमेरिका अब अतीत के प्रभुत्व का आनंद नहीं ले पा रहा है। अमेरिका कहते हुए घूम रहा है कि वह दुनिया की नंबर एक ताकत है, जबकि यह सच नहीं है।
अब दुनिया में नंबर वन नहीं रहा अमेरिका : ईरानी राजदूत जलाली ने ईरान के खिलाफ नवीनतम अमेरिकी प्रतिबंधों पर कहा कि वास्तविकता यह है कि अमेरिका को कई देशों ने मिलकर घेर लिया है और उसे पछाड़कर अब वह नंबर एक बन गए हैं। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अधिकतम दबाव हमारे परमाणु कार्यक्रम को प्रभावित करने के लिए किया है, जबकि हमने प्रतिबंधों के उपयोग अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए शुरू कर दिया है।
रूस और चीन से अमेरिका के खिलाफ खड़े होने की अपील : जलाली ने अमेरिका के खिलाफ रूस और चीन और दुनिया के अन्य देशों को खड़ा होना चाहिए। हमें अमेरिका को यह बताना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय परिदृष्य में ताकत का गलत इस्तेमाल करने का हानिकारक प्रभाव हो सकता है। अक्टूबर में ईरानी बैंकों पर लगाए गए अमेरिका के नए प्रतिबंधों के खिलाफ राष्ट्रपति रूहानी और विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ईरान ने तो इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था।
रूसी विदेश मंत्री ने किया ईरान के समर्थन का वादा : कुछ दिनों पहले ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक डॉ मोहसिन फखरीजादेह की हत्या की निंदा की थी। उन्होंने अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरानी सेना के जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या को भी अस्वीकार्य बताया था। उन्होंने अपने इंटरव्यू में रूस और ईरान के बीच मजबूत होते संबंधों का भी जिक्र किया था।
रूस ने बताया क्यों की गई परमाणु वैज्ञानिक की हत्या : ईरान की सरकारी मीडिया आईआरटीवी 1 को दिए गए इंटरव्यू में सर्गेई लावरोव ने ईरान और रूस को दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में प्रमुख बताया। उन्होंने ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या की निंदा करते हुए इसे आतंकवादी कृत्य करार दिया। उन्होंने फखरीजादेह की हत्या को विदेशी सरकारों के दखल का मुद्दा बताते हुए कहा कि इसे क्षेत्र में अशांति फैलाने की नीयत से अंजाम दिया गया था।
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