
जन्माष्टमी का त्योहार देश के हर कोने में बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। भगवान कृष्ण के भक्तगणों में इस दिन को लेकर बहुत ही उत्साह भरा हुआ होता है। इस दिन हर कोई भगवान कृष्ण के प्रेम में रंगना चाहता है। हिंदू धर्म के इस पावन दिन को श्रीकृष्ण की पूजा के साथ-साथ, उन्हें अनेक प्रकार के भोग लगाए जाते हैं जिनमें से माक्खन, मिश्री श्रेष्ठ होता है। वहीं इस दिन लोग अपने आराध्य के जन्म दिन पर व्रत भी रखते हैं। शास्त्रो के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत रात बारह बजे तक किया जाता है। इस व्रत को करने वाले रात बारह बजे तक कृष्ण जन्म का इंतजार करते हैं और उसके पश्चात पूजा आरती और फिर प्रसाद वितरित होता है। ऐसे में इस खास मौके पर अगर आप भी पाना चाहते हैं अपने इष्ट भगवान कृष्ण की कृपा को तो आज हम आपको इस दिन से जुड़े कुछ विशेष मंत्रों के बारे में बताएंगे, जिससे कि आपकी हर कामना पूरी हो सकती है।
भगवान कृष्ण की आराधना के लिए आप यह मंत्र पढ़ सकते हैं-
ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्ते ज्योतिशां पते!
नमस्ते रोहिणी कान्त अर्घ्य मे प्रतिगृह्यताम्!!
संतान प्राप्ति के लिए :
संतान की इच्छा रखने वाले दंपति, संतान गोपाल मंत्र का जाप पति-पत्नी दोनों मिल कर करें। अवश्य लाभ होगा।
देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते!
देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:!!
दूसरा मंत्र :
! क्लीं ग्लौं श्यामल अंगाय नम:!!
विवाह विलम्ब के लिए :
ओम् क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्ल्भाय स्वाहा।
इन मंत्रों की एक माला अर्थात 108 मंत्र कर सकते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजन के साथ-साथ व्रत रखना भी बहुत फलदायी माना जाता है। इसे व्रत व्रतराज भी कहा जाता है। इस व्रत का विधि-विधान से पालन करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है।
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