
गृहस्थी में प्रतिदिन कोई-न-कोई समस्या सामने आती ही रहती है। जिस जन्म पत्रिका के चतुर्थ भाव स्थान में राहू-मंगल, राहू-शनि की ग्रह युति है तो मकान में रहने के कारण वास्तु दोष आ जाता है। जिस जातक की जन्मकुंडली में मंगल-राहू की स्थिति किसी भी भाव स्थान में इकट्ठी हो, ऐसे जातक का दूषित जगह में रहने का पक्का मजबूत योग बनता है। ऐसी कुंडली का जातक जिस मकान में रहेगा, वह मकान अवश्य ही बाधाग्रस्त होगा तथा उस मकान की रचना ऐसी होगी जिसमें दक्षिण-पश्चिम एवं नैर्ऋत्य दिशा से आने वाली किरणों का संगम अवश्य होगा। किसी न किसी रूप में ही सही, इन दिशाओं से आने वाली किरणों का संगम ही कुंडली में मंगल-राहू की युति है।
ऐसे मकान में रहने वालों को हमेशा अकस्मात एक्सीडैंट का भय रहेगा। ऐसा जातक सुख-शांति से वंचित रहेगा, इसलिए मकान की रचना ऐसी होनी चाहिए जिसमें दक्षिण एवं नैर्ऋत्य कोण से आने वाली प्रकाश की किरणों का संयोग न हो। वास्तुदोष से युक्त मकान को ही भूत बंगला (डोम स्थान) कहा जाता है। अत: वास्तुदोष को दूर करने के लिए वास्तु पुरुष की पूजा करें।
प्रवेश द्वार के आस-पास बाहरी हिस्से में ड्रेनेज लाइन के नल (गंदे पानी के निकास वाले पाइप) नहीं होने चाहिए। ऐसे मकान में रहने वालों को भयानक कष्ट एवं दारुण दुखों का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातक सुख-समाधान से हमेशा वंचित रहते हैं।
कभी भी आधा-अधूरा मकान, बे-औलाद व्यक्ति का मकान या उजड़ी हुई फैक्टरी नहीं खरीदनी चाहिए।
शौचालय कभी भी मुख्य दरवाजे के पास नहीं होना चाहिए।
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सीढिय़ों के नीचे गुसलखाना अथवा रसोई नहीं होनी चाहिए।
मकान के सामने अथवा 100 फुट के भीतर चर्च, मंदिर, जंजघर, गुरुद्वारा, मस्जिद, दरगाह या अन्य धार्मिक स्थान नहीं होना चाहिए।
पानी की टंकी उत्तर दिशा में होनी चाहिए।
अगर मकान में प्रवेश करने से श्वास की गति बढ़ जाए तो मकान में वास्तु दोष है।
रसोई चूल्हा, जैनरेटर, इन्वर्टर, बिजली की मोटर पूर्व-दक्षिण कोण दिशा में होनी चाहिए।
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