
पाकिस्तान को जल्द ही चीन से J-35 लड़ाकू विमान मिल सकता है। J-35 एक स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे सामान्य रडार से डिटेक्ट करना काफी मुश्किल है। चीन ने इसे खास तौर पर उन देशों को बेचने के लिए बनाया है, जो पश्चिमी लड़ाकू विमानों को नहीं खरीद सकते। पाकिस्तान के खरीदारों में पाकिस्तान भी शामिल है, जो अमेरिका के F-35 जेट को खरीदने के काबिल नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान चीन से 40 J-35 लड़ाकू विमान खरीदेगा, जिससे दक्षिण एशिया में हवाई शक्ति संतुलन बदल सकता है। पाकिस्तान J-35 को खास तौर पर भारत के राफेल लड़ाकू विमानों की काट के रूप में खरीद रहा है।
पाकिस्तान ने चीन के साथ जो डील की है, उसके तहत उसे 40 J-35 लड़ाकू विमान मिलेंगे। इसके अलावा चीन पाकिस्तानी पायलटों को ट्रेनिंग भी देगा। पाकिस्तान को J-35 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी 2026 के अंत तक शुरू हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने J-35 लड़ाकू विमान को खासतौर पर अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II के निर्यात के दबदबे को चुनौती देने के लिए तैयार किया है। J-35 खरीदार देशों को एक कम लागत वाला विकल्प पेश करता है, जो पश्चिमी देशों की महंगी तकनीक को चुनौती देता है। इसके साथ ही हथियारों के बाजार में चीन का दबदबा भी बढ़ा सकता है।
J-35 लड़ाकू विमान के बारे में जानें – J-35 एक मध्यम आकार का, ट्विन-इंजन वाला स्टील्थ फाइटर जेट है। यह दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम है। इसे उन्नत हवाई युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि, चीन ने इसे मुख्य रूप से विमान वाहक पोतों से उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया है, लेकिन इसे जमीन से भी ऑपरेट किया जा सकता है।
J-35 लंबी दूरी तक मारक क्षमता (1,200-1,350 किमी) और आधुनिक एवियोनिक्स से लैस है। J-35 का रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) बहुत छोटा है, जिसे चीनी मीडिया ने ‘इंसानों की हथेली से भी छोटा’ बताया है, जिससे यह दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आता।
यह ट्विन-इंजन (WS-19 या WS-13) वाला विमान है, जो लगभग Mach 1.8 की गति तक पहुंच सकता है।
इसमें हथियारों को रखने के लिए इंटरनल वेपन बे है, जो स्टील्थ प्रोफाइल को बनाए रखते हुए 2,000 किलोग्राम तक के हथियार ले जा सकता है। कुल मिलाकर यह 8,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है।
इसमें एईएसए (AESA) रडार और आधुनिक सेंसर फ्यूजन तकनीक है, जो पायलट को युद्ध के मैदान की व्यापक स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करती है। इसकी लगभग 1,200 से 1,350 किलोमीटर की युद्धक सीमा इसे क्षेत्रीय युद्ध क्षेत्रों में दूर तक ऑपरेशन करने की क्षमता देती है।
चीन ने J-35 फाइटर जेट को क्यों बनाया – J-35 के संबंध में चीन की निर्यात स्थिति एक सोची-समझी रणनीति को दर्शाती है। इसका उद्देश्य उन बाजारों में पैठ बनाना है जो पश्चिमी निर्यात नियंत्रणों से बाधित हैं—विशेष रूप से वे बाजार जो F-35 तक पहुंच बनाने में असमर्थ हैं। चीन के साथ पाकिस्तान का लंबे समय से चला आ रहा रक्षा सहयोग एक ऐसा मूलभूत औद्योगिक और ऑपरेशनल माहौल तैयार करता है जो J-35 को अपनाने के लिए अनुकूल है। यह खरीद पाकिस्तान की हवाई शक्ति में इजाफा करेगी और दक्षिण एशिया का पहला ऐसा देश बनाएगी जो पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान ऑपरेट करेगा।
J-35 का भारत के राफेल से मुकाबला – ऐसा माना जा रहा है कि भविष्य के संघर्ष में पाकिस्तान के J-35 लड़ाकू विमान का मुकाबला भारत के राफेल फाइटर जेट से होगा। J-35 एक 5वीं पीढ़ी का पूर्ण स्टील्थ विमान है जो दुश्मन के रडार से बचकर हमला करने में माहिर है, जबकि राफेल 4.5 पीढ़ी का ओमनीरोल विमान है जो अपनी जबरदस्त मारक क्षमता, रडार जैमिंग (SPECTRA) और डॉगफाइट (आमने-सामने की लड़ाई) में माहिर है। राफेल 14 हार्डपॉइंट्स पर 9,500 किलोग्राम से अधिक का पेलोड ले जा सकता है। जे-35 अपने हथियारों को रडार से बचने के लिए मुख्य रूप से आंतरिक बे (Internal Bay) में रखता है। राफेल मीटिओर जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस है, जो अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ हैं। वहीं, J-35 PL-15 और PL-10 मिसाइलों का उपयोग कर सकता है।
Home / News / पाकिस्तान को मिलने वाले हैं चीनी ‘अदृश्य’ लड़ाकू विमान! भारत की बढ़ेगी टेंशन, राफेल दे पाएगा जवाब?
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