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‘यमन के इतिहास से सीखे पाकिस्तान’, हूतियों के खिलाफ सऊदी की मदद पर भड़का ईरान, मुनीर-शहबाज को वॉर्निंग


यमन के हूती विद्रोहियों ने बीते हफ्ते सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एयरपोर्ट पर मिसाइल हमला किया है। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी सना और हूती नियंत्रण वाले इलाकों में हवाई हमले तेज कर दिए हैं। मक्का समझौते के तहत तुर्की और पाकिस्तान से भी सऊदी को मदद मिल रही है। यह ईरान को नागवार गुजरा है और उन्होंने पाकिस्तान से इससे बचने के लिए कहा है। हूती विद्रोहियों को ईरान के खास सहयोगियों में माना जाता है।
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा समझौता लागू होने के बाद ईरान ने इसकी तीखी आलोचना की है। उसने यमन के मामलों में दखल ना देने की चेतावनी दी है। तेहरान ने पाकिस्तान की ईरान और अमेरिका के बीच बतौर मध्यस्थ की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मक्का समझौता 5 अक्टूबर को अपने ऑपरेशनल चरण में पहुंचा है। तुर्की और पाकिस्तान ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब की मदद के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
सऊदी को किस तरह की मदद – ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, तीनों देशों के बीच हुई बातचीत के तहत पाकिस्तानी और तुर्की सेनाएं सऊदी अरब को मिलिट्री, टेक्निकल और इंटेलिजेंस सपोर्ट देंगी, जिसमें देश के अंदर सुरक्षा क्षमताएं भी शामिल हैं। हालांकि फिलहाल पाकिस्तान और तुर्की सीधे हमलों में शामिल नहीं हैं। अधिकारियों ने कहा है कि ये सेनाएं यमन में आक्रामक अभियानों में हिस्सा नहीं लेंगी।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई से रविवार को उन खबरों के बारे में पूछा गया कि सऊदी अरब में हजारों पाकिस्तानी सैनिकों को तैनात किया जा सकता है। इस पर उन्होंने कहा, ‘हमने भी यह अफवाह सुनी है। हम मानते हैं कि यह सच नहीं है। इस इलाके के देश अच्छी तरह जानते हैं कि यमन के मामले में किसी भी तरह के दखल के बुरे नतीजे हो सकते हैं।’
सऊदी को पाकिस्तान और तुर्की से मदद पर हम कई बातें सुन रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि मक्का समझौते का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय के हितों और भलाई के खिलाफ नहीं किया जाएगा। इस्माइल बघई
सुरक्षा के लिए अपील – ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने एक बयान में सीधेतौर पर मक्का समझौते का जिक्र किए बिना पड़ोसी देशों से आत्मनिर्भरता और सच्चे भाईचारे पर आधारित नीति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समझौते ईरान को रोक नहीं पाएंगे। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के सदस्य अहमद बख्शायेश ने इसे कागजी समझौता कहा है।
ईरान के अलाउद्दीन बोरुजेर्दी ने कहा है कि पाकिस्तान और तुर्की का शामिल होना निश्चित रूप से उनके अपने नुकसान का कारण बनेगा। उन्हें इतिहास से सीखना चाहिए। सऊदी अरब का कभी कई देशों के साथ गठबंधन था लेकिन यमन में सात साल के युद्ध के बाद उसे हार का सामना करना पड़ा।
सऊदी अरब को पता होना चाहिए कि तुर्की और पाकिस्तान के साथ कागजी समझौते से उन्हें सुरक्षा नहीं मिलेगी, ठीक वैसे ही जैसे सालों तक अमेरिकियों का एकतरफा फायदा उठाने से उन्हें सुरक्षा नहीं मिली थी। अपनी नीतियां सुधारें ताकि आपको सुरक्षा के लिए दूसरों के सामने गिड़गिड़ाना ना पड़े। इब्राहिम रेजाई
क्षेत्रीय हस्तक्षेपकर्ता की आलोचना – ईरान की आलोचना तुर्की की तुलना में पाकिस्तान पर केंद्रित रही है, जिसका मुख्य कारण तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थता में इस्लामाबाद की अहम भूमिका है। सांसद अहमद नादेरी ने एक्स पर लिखा कि यमन के लोगों के खिलाफ युद्ध में सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का शामिल होना दिखाता है कि पाकिस्तान को अब मध्यस्थ नहीं, बल्कि क्षेत्रीय हस्तक्षेपकर्ता माना जाना चाहिए।