
ईरान और अमेरिका में मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर तेहरान से सवाल उठाए गए हैं। ईरान के सांसद इब्राहिम रजाई ने कहा है कि पाकिस्तान हमारा अच्छा पड़ोसी है लेकिन अमेरिका से उसके संबंधों को देखते हुए मध्यस्थ के रूप में उसकी निष्पक्षता पर संदेह होता है। ईरानी मजलिस (संसद) के मेंबर और पूर्व में संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता रहे रजाई का बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता के लिए कोशिश कर रहे हैं।
इब्राहिम ने रविवार शाम को एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान और अमेरिका के दशकों पुराने संबंधों की ओर इशारा किया। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान हमारा एक अच्छा दोस्त और पड़ोसी है लेकिन बातचीत के लिए वह एक उपयुक्त मध्यस्थ नहीं है। पाकिस्तान में मध्यस्थता के लिए जरूरी विश्वसनीयता की कमी है।
पाकिस्तान जैसा देश ईरान और अमेरिका में बातचीत के लिए सही मध्यस्थ नहीं है। इसकी वजह पाकिस्तान का अमेरिका की ओर झुका होना है। पाकिस्तान हमारा अच्छा पड़ोसी है लेकिन वह ध्यान डोनाल्ड ट्रंप के हितों का रखता है। पाकिस्तान ने लगातार अमेरिकियों की वादाखिलाफी पर पर्दा डाला है, जो नहीं होना चाहिए। ईरानी सांसद इब्राहिम रजाई
‘ट्रंप का पक्ष लेते हैं पाकिस्तानी’ – इब्राहिम रजाई का कहना है कि पाकिस्तानी हमेशा डोनाल्ड ट्रंप के हितों का ध्यान रखते हैं। पाकिस्तानी अमेरिकियों की इच्छा के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलते है। उदाहरण के लिए वे दुनिया को यह बताने को तैयार नहीं हैं कि अमेरिका ने पहले पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार किया लेकिन बाद में अपने वादे से साफ मुकर गया।
रजाई ने कहा कि अमेरिका ने लेबनान में सीजफायर के मुद्दे पर बहुत साफतौर पर अपनी बात से पलटी मारी है। पाकिस्तानी इस पर चुप हैं और वे यह भी नहीं बता रहे कि रोकी गई संपत्तियों के संबंध में अमेरिकियों ने कुछ वादे किए लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया। एक मध्यस्थ को किसी की तरफ झुका हुआ नहीं बल्कि निष्पक्ष होना चाहिए।
पाकिस्तान में बातचीत – अमेरिका-इजरायल के गठबंधन ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद 39 दिन तक दोनों पक्षों में भीषण लड़ाई चली। आखिरकार दोनों पक्षों में 8 अप्रैल को जंगबंदी पर सहमति बनी। इसके बाद सीजफायकर समझौते पर आगे की बातचीत के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने के लिए पाकिस्तान ने दोनों देशों के डेलीगेशन की बैठक 12-13 अप्रैल को इस्लामाबाद में कराई। हालांकि 21 घंटे लंबी यह बातचीत बेनतीजा रही। अमेरिका और ईरान के बीच ये बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। इसके बाद से दूसरे दौर की वार्ता की कोशिश में पाकिस्तान लगा है।
पाकिस्तान मध्यस्थ बनकर खुद को दुनिया के सामने शांतिदूत की तरह पेश कर रहा है। वहीं ईरान के सांसद उस पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल पाकिस्तान के अमेरिका के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। पाकिस्तान को इस क्षेत्र का अमेरिका का सबसे अच्छा सहयोगी माना जाता है। ऐसे में ईरान का शक पूरी तरह बेवजह नहीं है।
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