
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल के बीच जारी सियासी गतिरोध एक फिर तेज हो गया है। प्रचंड ने पीएम ओली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में एकता बनाए रखने के नाम पर नेताओं के गलत इरादों और विचारों की अनदेखी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पार्टी में टूट को उकसाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी की है।
हमने जनता की मांग के कारण पार्टी विभाजित होने से रोका
काठमांडू में आयोजित 23 वें तुलसीलाल अमात्य स्मृति दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रचंड ने कहा कि पार्टी में चल रहे गलत रवैये को रोके जाने की आवश्यक्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के नेतृत्व ने लोगों की इच्छा को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि पार्टी को विभाजित नहीं होना चाहिए। इसके लिए हमें सभी प्रकार के विचारों, तथ्यों और दृष्टिकोण को स्वीकार करने की जरुरत है।
उन्होंने कहा कि पार्टी में एकता के नाम पर जारी किसी भी गलत विचारधारा को पर्दे के पीछे जारी नहीं रखना चाहिए। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी विचारधारा की राजनीति करती है और हमारे पहले के नेताओं ने इसी के लिए अपना बलिदान भी दिया है। हमें आपसी एकता को बनाए रखना होगा।
संसद को भंग कर चुनाव करा सकते हैं ओली
चीन के बल पर सत्ता बचाने की कोशिशों में जुटे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अब संसद को भंग करने और मध्यावधि चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं। नेपाली अखबार कांतिपुर की रिपोर्ट के मुताबिक केपी शर्मा ओली और उनके विरोधी पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ दोनों ही शह और मात के लिए अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
ओली प्रचंड के बीच सुलह के आसार कम
ओली की तैयारी को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों ही धड़ों के बीच सहमति बनने के आसार कम होते जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक ओली दो विकल्पों पर विचार रहे हैं। पहला-पार्टी के बंटवारे पर अध्यादेश लाया जाए ताकि कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव चिन्ह उनके पास ही रहे। दूसरा-संसद को भंग करके मध्यावधि चुनाव कराए जाएं। हालांकि यह दोनों ही रणनीति ओली के लिए आसान नहीं होने जा रही है।
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