Sunday , December 5 2021 8:22 PM
Home / Spirituality / धन और वैभव को घर-ऑफिस में स्थापित करती है ये 1 वस्तु, शुक्रवार को खरीदें

धन और वैभव को घर-ऑफिस में स्थापित करती है ये 1 वस्तु, शुक्रवार को खरीदें


भारत के बहुत सारे मठों और मंदिरों में यंत्रराज का पूजन किया जाता है जिससे उनका वैभव अक्षुण्ण रहता है। सोमनाथ मंदिर में प्रत्येक ईंट पर यह यंत्र स्थापित था, जिसकी वजह से वहां अकूत सम्पदा थी, जिससे महमूद गजनवी ने उसे बार-बार लूटा। ऐसा माना जाता है। यंत्रों के बिना देवपूजा निष्फल हो जाती है। इसलिए श्रीनाथ मंदिर में सुदर्शन चक्र, जगन्नाथपुरी में भैरवी चक्र तथा तिरुपति में श्रीयंत्र स्थापित है। मान्यता के अनुसार, जिस स्थान पर धन की देवी मां लक्ष्मी का यंत्र स्थापित हो जाता है, वह उस स्थान पर अपना वास बनाने के लिए विवश हो जाती हैं। संसार का सबसे ताकतवर यंत्र है श्रीयंत्र। इससे हर तरह की दरिद्रता दूर होती है। जिस घर-ऑफिस में ये होता है वहां धन, संपदा, संपन्नता और वैभव सदा विराजित रहता है।

क्या आप तनाव में हैं ? व्यापार में घाटा हो रहा है ? आर्थिक परेशानियों से मुक्ति नहीं मिल रही है ? चारों तरफ से भविष्य अंधकारमय लगने लगा है ? धन को प्राप्त करने के लिए जरुरत है मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की। इसका सरल एवं उत्तम साधन है स्फटिक श्री यंत्र। श्री का अर्थ है धन और यंत्र का अर्थ है साधन अर्थात धन प्राप्त करने का साधन है श्री यंत्र। श्री यंत्र उत्त्प्रेरक रूप में उर्जा के कंडक्टर का काम करता है। श्री यंत्र शुक्रवार के दिन घर या ऑफिस में विधि-विधान से स्थापित करना चाहिए। श्री यंत्र को शुभ मुहूर्त में साफ़ पानी से धो कर पंचामृत एवं गंगाजल से स्नान करवाकर पूजा स्थल पर पीले कपडे में रखना चाहिए तत्पश्चात कच्ची हल्दी व फुल चढ़ाएं, अष्टगंध का टीका लगाकर शुद्ध घी का दीपक जलाकर अगरबत्ती जलाकर श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए।

प्रत्येक शुक्रवार को नियमित रूप से श्री यंत्र की पूजा करें। श्री यंत्र ऐसा माध्यम है जिससे मनुष्य के जीवन की समस्त नकारात्मकता समाप्त हो जाती है और उसकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करने की शक्ति मिलती है। यंत्रराज श्री यंत्र स्वयं में मानव शरीर का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। तांत्रिक साहित्य में जितना अधिक श्रीयंत्र पर लिखा गया है, उतना अन्य किसी विषय पर नहीं। श्रीयंत्र पूजन की दक्षिणमार्गी और वाममार्गी विधियों का वर्णन त्रिपुरतापिनी और त्रिपुरा उपनिषदों में मिलता है। कहते हैं कि श्रीयंत्र का अतिभाव से नित्यपूजन करने, दर्शन करने तथा उसके समक्ष श्री सूक्त का पाठ करने से अथाह धन संपत्ति प्राप्त होती है।

About indianz xpress

Pin It on Pinterest

Share This