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भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने को तैयार, लिपुलेख विवाद के बीच नेपाल का बड़ा बयान


नेपाल ने शुक्रवार को कहा है कि वह भारत के साथ सीमा विवाद को कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। नेपाली विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा “हमने लिपुलेख के संबंध में अपने विचार पहले ही सार्वजनिक कर दिए हैं। हमने नेपाल के क्षेत्र लिपुलेख के रास्ते भारत और चीन के बीच प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में भी अपने विचार व्यक्त किए हैं।” छेत्री ने आगे कहा कि नेपाल, नेपाल और भारत के बीच मौजूद घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंधों की भावना के अनुरूप इस मुद्दे को सुलझाने को इच्छुक है।
उन्होंने कहा “नेपाली सरकार ऐतिहासिक समझौतों और आपसी समझ, तथ्यों, नक्शे और सबूतों के आधार पर कूटनीतिक माध्यमों से सीमा से जुड़े मुद्दे को सुलझाने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।” नेपाली विदेश मंत्रालय की ये टिप्पणी उस वक्त आई है जब भारत ने लिपुलेख पर नेपाल सरकार की आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया था। नेपाल ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। दोनों ही देश इस हिस्से पर अपना अपना दावा करते हैं।
विवादित जगहों पर बातचीत को तैयार नेपाल – भारत ने काठमांडू के इस क्षेत्र पर क्षेत्रीय दावों को “एकतरफा और मनगढ़ंत विस्तार” बताते हुए खारिज कर दिया है। जिसे नई दिल्ली “अमान्य” मानती है। नई दिल्ली की यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब नेपाल के विदेश मंत्रालय ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते होने वाली वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए भारत और चीन की तैयारियों पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह क्षेत्र उसका है। छेत्री ने कहा कि महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र “1816 की सुगौली संधि के आधार पर नेपाल के अविभाज्य अंग हैं।” उन्होंने कहा “हम भारत और चीन, दोनों को ही अपना रुख और अपनी चिंता पहले ही बता चुके हैं।”
इससे पहले सोमवार को नेपाल सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने मीडिया से कहा था कि नेपाल का “अपनी सीमा बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। यह इलाका नेपाल का है और सरकार का इस बारे में स्पष्ट नजरिया है और वह अपने रुख पर कायम है।” पोखरेल, जो शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री भी हैं, उन्होंने कहा “इस मुद्दे को दोनों देशों के बीच सहयोग और कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।”
जून से अगस्त के बीच कैलाश यात्रा – भारतीय विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को घोषणा की कि सालाना कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से अगस्त तक दो रास्तों से होगी, उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में माउंट कैलाश और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा का हिंदुओं, जैनियों और बौद्धों के लिए धार्मिक महत्व है। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के तहत लगभग पांच साल के अंतराल के बाद पिछले साल यह यात्रा फिर से शुरू हुई थी।