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पत्नी ने नाम से पुकारा तो डर गया बेचारा पति, मासूमियत से पूछा ‘मैंने क्या गलत किया’

पत्नी ने पति को पुकारा और वो डर गया। सुनने में ही अजीब लगता है। है ना? लेकिन हुआ कुछ ऐसा ही है। एक पत्नी ने अपने पति को बस उसके पहले नाम से पुकारा और अनुरोध किया कि क्या वह उन्हें ड्रिंक पास कर सकते हैं। सेकंड पार्ट को छोड़ पति की सुई नाम वाले हिस्से पर ही अटक गई। वह चौंक गया और मासूमियत से पूछा ‘मैंने क्या गलत किया?’ ‘आज क्या तारीख है?’ ‘तुम मुझे मेरे नाम से क्यों पुकार रही हो?’
ये है पूरा मामला : दरअसल, कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चला था, जिसमें पत्नियां अपने पति को निक नेम्स की जगह उनके पहले नाम से पुकार रही थीं। ऐसा करने पर पति कैसा रिऐक्शन देते हैं, इसे कैमरे में कैद कर शेयर किया जा रहा था। ज्यादातर विडियोज में पतियों के ऐसे रिऐक्शन्स देखने को मिले, जिसने लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया।
क्यों डरा देता है पूरा नाम : रिश्ते की शुरुआत में कपल्स एक-दूसरे को नाम से ही बुलाते हैं, लेकिन समय के साथ ज्यादातर जोड़े निक नेम्स डेवलप करते हैं, जो उनके लिए प्यार और लगाव जाहिर करने का जरिया बन जाता है। ऐसे में जब अचानक किसी दिन इन निक नेम्स को छोड़ साथी पहला नाम या सरनेम के साथ पूरा नाम लेता है, तो व्यक्ति को लगता है कि कुछ तो सीरियस हुआ है।
और डर गया पति
निक नेम है अच्छा इशारा : Northern Illinois University में प्रफेसर और कई किताबों की लेखक सुजैन डेगेस-वाइट के लेख ‘पेट नेम्स बिटवीन कपल्स आर अ वेरी गुड साइन’ में बताया गया कि कपल का एक-दूसरे को पेट/निक नेम्स से बुलाना अच्छे रिश्ते की ओर इशारा करता है। ये दिखाता है कि जोड़े के बीच का रिश्ता कितना ज्यादा मजबूत है। दोनों का एक-दूसरे के लिए निक नेम या पर्सनल इडीअम्ज़ बनाना उनके बीच के बॉन्ड और लव को शो करता है।
रिश्ते में दिखाता है संतुष्टि : जर्नल ऑफ सोशल ऐंड पर्सनल रिलेशनशिप्स में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, कपल का खुद के मुहावरे या निक नेम्स बनाना और उन्हें एक-दूसरे के लिए इस्तेमाल करना दिखाता है कि वे अपने रिश्ते में कितने संतुष्ट हैं। हालांकि, इसमें ये भी बताया गया कि ये चीजें ज्यादातर कपल्स के बीच रिश्ते के शुरुआती पांच साल के बाद कम होने लगती हैं, जो समय के साथ रिलेशनशिप में आने वाले सहज बदलावों को दिखाता है।
निक नेम इस्तेमाल करने के पीछे की मंशा : ‘ऐन एग्जामिनेशन ऑफ इडीअम्ज़ यूज ऐंड मैरिटल सैटिस्फैक्शन ओवर द लाइफ साइिकल’ की लेखक कैरल जे.एस ब्रूसेस ने एक इंटरव्यू में इस बारे में बात करते हुए बताया था कि व्यक्ति का अपनी भाषा बनाना और उसका उद्देश्य तय करना बेहद स्वाभाविक है। समय के साथ लोग इनका उपयोग किसी खास मंशा को पूरा करने के लिए भी करने लगते हैं, ताकि उन्हें वो परिणाम मिल सकें, जिसकी उन्हें आशा है।

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