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कौन हैं मालदीव की नेता इवा अब्दुल्ला जो भारत के लिए अपने पीएम से माफी मंगवाने पर अड़ गईं


मालदीव में सत्ता परिवर्तन होने के बाद लगातार भारत विरोध की बाढ़ आ गई है। पीएम मोदी और भारत के खिलाफ मालदीव के मंत्रियों की बयानबाजी ने एक बात साफ कर दी है कि मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी के नेता सिर्फ भारत विरोधी नहीं हैं। बल्कि उनके अंदर भारत के खिलाफ नफरत भरा है, जो उनके बयानों में झलकती है। उनके बयान भारत और मालदीव के संबंधों को खराब कर रहे हैं और इस बात को मालदीव के नेता भी जानते हैं। मालदीव की पूर्व डिप्टी स्पीकर इवा अब्दुल्ला ने मंत्रियों के सस्पेंड होने के बाद बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मांग की है कि मालदीव की सरकार भारत और उसके लोगों से माफी मांगे। आइए जानें कि मालदीव की यह नेता कौन हैं?
इवा अब्दुल्ला इब्राहिम सोलेह की सरकार में मालदीव की डिप्टी स्पीकर रह चुकी हैं। अपने खिलाफ अविश्वास मत से पहले उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। वह अभी एक सांसद हैं। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की वह चचेरी बहन हैं। वह पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ काम कर चुकी हैं। इतना ही नहीं वह स्थानीय समाचार पत्र मिनीवैन डेली की मैनजर भी रही हैं। 2009 से लगातार तीन बार वह गालोल्हू उथुरु निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार सांसद रहीं।
मालदीव की दूसरी महिला स्पीकर – मई 2023 में पार्टी छोड़ने से पहले वह मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य रहीं। अब वह मोहम्मद नशीद के नेतृत्व वाली पार्टी ‘द डेमोक्रैट्स’ की मेंबर हैं। इवा को 76 सांसदों के वोट से 2019 में डिप्टी स्पीकर चुना गया। वह इस पद के लिए चुनी जाने वाली दूसरी महिला थीं। उनसे पहले 2008 में अनीसा अहमद पहली महिला डिप्टी स्पीकर थीं। साल 2023 में उनके खिलाफ50 सांसद अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए। लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफा देना सही समझा।
विदेशों से की है पढ़ाई – इवा की पढ़ाई की बाद करें तो उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा विदेशों से प्राप्त की है। इवा ने केंट यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। वहीं इंग्लैंड की वारविक यूनिवर्सिटी से राजनीति और सरकार में बीए और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एमए किया है। मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की ओर से पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पर वह भड़क गईं। उन्होंने कहा, ‘मैं जानती हूं कि मंत्री सस्पेंड कर दिए गए हैं। लेकिन मुझे लगता है कि मालदीव सरकार को औपचारिक तरीके से भारत और लोगों से माफी मांगनी चाहिए। मंत्री की टिप्पणी बेहद शर्मनाक, नस्लवादी और असहनीय है। हम इस बात को भलि-भांति जानते हैं कि भारत पर कितने निर्भर हैं और जब भी जरूरत पड़ी है, भारत हमेशा सबसे पहली प्रतिक्रिया देने वालों में से रहा है।’