
हनुमान जी की उपासना महिलाएं व पुरूष दोनों कर सकते हैं लेकिन बहुत से लोगों का मानना है की महिलाओं को हनुमान जी की पूजा नहीं करनी चाहिए क्योंकि वो बाल ब्रह्मचारी थे ऐसा मानना गलत है हनुमान जी के लिए सभी महिलाएं बहन, बेटी और पुत्री के समान हैं। वे अपने भक्तों में किसी भी प्रकार का लिंग भेद नहीं करते।
एक कथा के अनुसार जब श्रीराम लक्ष्मण और सीता सहित अयोध्या लौट आए तो एक दिन हनुमान जी माता सीता के कक्ष में पहुंचे। उन्होंने देखा कि माता सीता लाल रंग की कोई चीज मांग में सजा रही हैं।
हनुमान जी ने उत्सुक हो माता सीता से पूछा यह क्या है जो आप मांग में सजा रही हैं। माता सीता ने कहा यह सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर है। इसे मांग में सजाने से मुझे राम जी का स्नेह प्राप्त होता है और उनकी आयु लंबी होती है। यह सुन कर हनुमान जी से रहा न गया ओर उन्होंने अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लिया तथा मन ही मन विचार करने लगे इससे तो मेरे प्रभु श्रीराम की आयु ओर लम्बी हो जाएगी ओर वह मुझे अति स्नेह भी करेंगे। सिंदूर लगे हनुमान जी प्रभु राम जी की सभा में चले गए।
राम जी ने जब हनुमान को इस रुप में देखा तो हैरान रह गए। राम जी ने हनुमान से पूरे शरीर में सिंदूर लेपन करने का कारण पूछा तो हनुमान जी ने साफ-साफ कह दिया कि इससे आप अमर हो जाएंगे और मुझे भी माता सीता की तरह आपका स्नेह मिलेगा।
हनुमान जी की इस बात को सुनकर राम जी भाव विभोर हो गए और हनुमान जी को गले से लगा लिया। उस समय से ही हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है और सिंदूर अर्पित करने वाले पर हनुमान जी प्रसन्न रहते हैं।
महिलाएं हनुमान जी को सिंदूर नहीं चढ़ाती। वे केवल अपने पति, पुत्र और देवी मां को ही सिंदूर लगा सकती हैं। वे सिंदूर के स्थान पर लाल रंग के फूल चढ़ाएं।
महिलाएं हनुमान जी का सिंदूर मांग में भी नहीं सजा सकती क्योंकि वह बाल ब्रह्मचारी थे, वह अपनी चूड़ियों पर उनका सिंदूर लगा सकती हैं।
हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल लगाने से रोग, शोक और ग्रह दोष समाप्त होते हैं।
अपने जीवन का नियम बना लें की प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में सिंदूर अर्पित करना ही है, ऐसा करने से हनुमान जी सदा आपके अंग-संग रहेंगे।
जब भी किसी काम के लिए घर से बाहर जाएं तो उनके चरणों के सिंदूर को अवश्य अपने माथे पर लगाएं। ऐसा करने से आपकी बुद्धि कुशाग्र होगी और अनचाहे संकट टल जाएंगे।
मंगल ग्रह को अपने अनुकुल करने के लिए हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें।
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