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किसी भी शुभ कार्य में सबसे पहले क्‍यों की जाती है गणेशजी की पूजा


गहरे आध्‍यात्मिक महत्‍व को दर्शाता है गणेशजी का रूप : विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समृद्धि, बुद्धि और अच्‍छे भाग्‍य का देवता माना जाता है और सर्वशक्तिमान माने जाते हैं। माना जाता है कि भगवान गणेश, मनुष्‍यों के कष्‍ट हर लेते है और उनकी पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। परंपरा के अनुसार, हर धार्मिक उत्‍सव और समारोह की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से ही होती है। गणेश भगवान का रूप, मनुष्‍य और जानवर के अंग से मिलकर बना हुआ है। जो गहरे आध्‍यात्मिक महत्‍व को दर्शाता है।
इसलिए होती है सबसे पहले गणेशजी की पूजा : भगवान गणेश को सभी अच्‍छे गुणों और सफलता प्रदान करने वाला देवता माना जाता है इसलिए लोग हर अच्‍छे काम को करने से पहले गणेशजी की पूजा करना शुभ मानते हैं। भगवान गणेश के जन्‍मदिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म के लोग, आध्‍यात्मिक शक्ति के लिए, कार्य सिद्धि के लिए और लाभ प्राप्ति के लिए भगवान गणेश का पूजन धूमधाम से करते हैं। भगवान गणेश को सभी दुखों का हर्ता, संकट दूर करने वाला, सद्बुद्धि देने वाला माना जाता है। उनकी पूजा करने से आध्‍यात्मिक समृद्धि मिलती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। आज हम आपको कुछ महत्‍वपूर्ण और रोचक तथ्‍य बता रहे हैं कि किसी भी समारोह, उत्‍सव या अनुष्‍ठान में भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले क्‍यों की जाती है।
गणेशजी की एक पत्‍नी हैं सिद्धि : हिंदू धर्म के सभी अनुयायियों का मानना है कि किसी भी नए काम को शुरू करते समय भगवान गणेश का पूजन करने से उसमें कोई बाधा नहीं आती है। ऐसा माना जाता है कि अगर आपकी सफलता के रास्‍ते में कोई बाधा आती है तो भगवान गणेश की पूजा करने से दूर हो जाती है। भगवान गणेशजी की एक पत्‍नी सिद्धि है। सिद्धि, आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है। इसलिए भगवान गणेश की पूजा, आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा तरीका माना जाता है। पारंपरिक रूप से, भगवान गणेश की सूंड सीधी तरफ घूमी हुई है इसी कारण उन्‍हें सिद्धिविनायक भी कहा जाता है।
गणेशजी की दूसरी पत्‍नी हैं रिद्धि : गणेशजी की दूसरी पत्‍नी का नाम रिद्धि है। रिद्धि का अर्थ होता है अच्‍छी किस्‍मत, संपत्ति और समृद्धि। गणेशजी की पूजा करने से आपको उनकी दूसरी पत्‍नी रिद्धि यानी अच्‍छी किस्‍मत, सफलता, धन, श्रेष्‍ठता प्राप्‍त होती है। घर में कन्‍या का नाम भी रिद्धि रखना बहुत शुभ माना जाता है।
भगवान गणेशजी के अस्‍त्र : भगवान गणेश, ऊपरी बाएं हाथ में एक कुल्‍हाड़ी धारण करते हैं जो उन्‍हें मानवीय भावनाओं से मुक्‍त दर्शाती है और उनके ऊपरी दाएं हाथ में कमल है जो उनके अंदर की शुद्धता और कोमलता को दर्शाता है। अत: स्‍पष्‍ट है भगवान गणेश, भावनाओं पर विजय प्राप्‍त कर चुके हैं और साफ मन से मानव जाति का उद्धार करते हैं।
भगवान गणेश की सवारी : भगवान गणेश की पूजा करने से मनुष्‍य के मन में भरा अहंकार मिट जाता है। भगवान गणेशजी की सवारी चूहा जो कि उनके पास ही बैठता है, हमेशा दर्शाता है कि कोई भी व्‍यक्ति अहंकार का त्‍याग करके सच्‍चे मन से सेवा भाव को अपना सकता है।
गणेशजी का बैठने का ढंग : भगवान गणेश सदैव बाएं पैर को दाएं पैर रखकर बैठते हैं, जो उनके ज्ञान को दर्शाता है कि वह हर बात को अलग नजरिए से देखते हैं। यह दर्शाता है कि एक सफल जीवन जीने के लिए ज्ञान और भावनाओं का सही उपयोग करना चाहिए।

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