
डीआरडीओ ने आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित की। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसका पहला युद्धक्षेत्र परीक्षण हुआ। इस मिसाइल के डेवलपमेंट में अहम रोल निभाने वाले प्रहलाद रामाराव ने बताया कि आकाश ने ड्रोन और मिसाइल हमलों को सफलतापूर्वक विफल किया। इस परियोजना पर 1994 में काम शुरू हुआ था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ऐसा लगा जैसे भारत और पाकिस्तान जंग की ओर बढ़ रहे। ये स्थिति उस समय आई जब पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइलों से अटैक किए। हालांकि, भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने पड़ोसी मुल्क की हर नापाक हरकत को फेल कर दिया। इस एक्शन में आकाश मिसाइल सिस्टम ने अहम रोल निभाया, जिससे दुनियाभर में इस प्रणाली ने सुर्खियां बटोरी। अब आकाश मिसाइल को डेवलप करने वाली टीम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे वैज्ञानिक प्रह्लाद रामाराव ने इस अचूक शस्त्र पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि जब यह मिसाइल सही तरीके से काम कर गई, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए।
‘आकाश की सफलता से मेरी आंखों में आंसू आ गए’ – डीआरडीओ के पूर्व प्रोजेक्ट निदेशक प्रह्लाद रामाराव ने आकाश मिसाइल रक्षा प्रणाली की सफलता पर खुशी जताई। आकाश ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम किया। इस प्रणाली को बनाने में 15 साल लगे और इसमें हजारों वैज्ञानिकों ने काम किया। रामाराव ने बताया कि 8 और 9 मई की रात को आकाश ने एस400 ट्रिम्फ और बराक-8 जैसे अन्य सिस्टम के साथ मिलकर पाकिस्तान के हमलों को विफल कर दिया।
DRDO के पूर्व प्रोजेक्ट निदेशक प्रह्लाद रामाराव ने बताई पूरी कहानी – प्रह्लाद रामाराव ने आकाश मिसाइल की सफलता पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, ‘मेरी आंखों में आंसू आ गए जब मेरे बच्चे ने इतना अच्छा काम किया। यह मेरे जीवन का सबसे खुशी का दिन है।’ रामाराव को भारत के ‘मिसाइल मैन’ एपीजे अब्दुल कलाम ने 35 साल की उम्र में आकाश प्रोग्राम का प्रमुख बनाया था। वे सबसे कम उम्र के परियोजना निदेशक थे। कलाम उस समय हैदराबाद में डीआरडीओ की रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला के प्रमुख थे।
इस प्रोजेक्ट पर 1994 में शुरू हुआ था काम – रामाराव ने बताया कि इस परियोजना पर काम 1994 में शुरू हुआ था। तब इसका बजट 300 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि जब आप कुछ नया बनाते हैं, तो कई बार असफल होते हैं। वे भी असफल हुए, लेकिन उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा। राजेंद्र नाम के जटिल मल्टी-फंक्शन इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड फेज्ड ऐरे रडार को विकसित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन हमने उस चुनौती को पार कर लिया। बाद में, परियोजना का बजट बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया गया
आकाश सबसे सस्ती और प्रभावी मिसाइल शील्ड – रामाराव ने दावा किया कि दुनिया में कहीं भी सिर्फ 500 करोड़ रुपये में मिसाइल रक्षा प्रणाली नहीं बनाई जा सकती। आकाश सबसे सस्ती लेकिन प्रभावी मिसाइल शील्ड है। यह 70 किलोमीटर की दूरी से दुश्मन की मिसाइल का पता लगा सकता है और 30 किलोमीटर की दूरी पर उसे मार सकता है। 2009 में विकास के बाद, आकाश में लगातार सुधार हुआ है। इसके कई रूप विकसित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।
पद्मश्री से सम्मानित हैं साइंटिस्ट प्रह्लाद रामाराव – डीआरडीओ के इस अनुभवी वैज्ञानिक को पद्मश्री सम्मान भी मिल चुका है। अब उनकी उम्र 78 साल है। उन्होंने आकाश मिसाइल की सफलता को अपने जीवन का सबसे खुशी का दिन बताया। आकाश मिसाइल रक्षा प्रणाली भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह देश की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करती है।
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