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कट्टर मुस्लिम देश में 700 करोड़ से ‘हिंदू मंदिर’ तैयार; PM मोदी करेंगे उद्घाटन, मन मोह लेंगी अद्भुत तस्वीरें


अयोध्या में राम मंदिल की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब एक कट्टर मुस्लिम देश में हिंदू मंदिर का उद्घाटन होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी बसंत पंचमी के अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी में विशाल राम मंदिर जैसे इस भव्य मंदिर (BAPS) का उद्घाटन करेंगे। अबू धाबी के सांस्कृतिक जिले में 27 एकड़ क्षेत्र में बना यह हिंदू मंदिर UAE की सद्भाव और सह-अस्तित्व की नीति की मिसाल बनेगा । इसकी आधारशिला 6 साल पहले रखी गई थी। मंदिर का मुख्य गुंबद पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु के साथ-साथ अरबी वास्तुकला में चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका मुस्लिम समुदाय में भी बहुत महत्व है।
यह मंदिर सभी धर्मों का स्वागत करेगा और भारतीय और अरब संस्कृति के मिश्रण का एक उदाहरण होगा। मंदिर प्रांगण में एक दीवार का भी निर्माण किया गया है। मंदिर की दीवारों पर अरब क्षेत्र, चीनी, एज़्टेक और मेसोपोटामिया की संस्कृतियों के बीच संबंधों को दर्शाती 14 कहानियां होंगी। BAPS स्वामीरायण संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख ब्रह्मविहारी स्वामी ने कहा कि यह किसी अरब देश में पहला विचार-आधारित BAPS होगा। 1997 में जब गुरु प्रधान स्वामी महाराज यहां आए तो उन्हें यहां एक हिंदू मंदिर बनाने का सपना आया। आज 27 साल बाद ये सपना पूरा हो रहा है।
मंदिर के द्वार पर रेत का टीला बना हुआ है, जो सातों अमीरों से रेत लाकर बनाया गया है। आगे गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है, मुख्य प्रवेश द्वार से पहले सीढ़ियों के दोनों ओर गंगा और यमुना बहती हैं और प्रकाश के साथ सरस्वती नदी की कल्पना की जाती है। गंगा के किनारे 96 घंटियाँ लगाई गई हैं, जो 96 वर्षों की तपस्या का प्रतिनिधित्व करती हैं। मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर ठंडी रहने वाली नैनो टाइलें लगाई गई हैं।
इसके साथ ही मंदिर के दाहिनी ओर गंगा घाट है, जिसमें गंगा जल उपलब्ध कराया जाएगा।मंदिर में सात शिखर हैं जो संयुक्त अरब अमीरात के सात अमीरातों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में राम-सीता, शिव-पार्वती समेत सात देवता विराजेंगे। बाहरी दीवारों के पत्थरों पर महाभारत और गीता की कहानियाँ खुदी हुई हैं। संपूर्ण रामायण, जगन्नाथ यात्रा और शिव पुराण भी दीवारों पर पत्थरों से उकेरे गए हैं।
मंदिर परिसर में प्रार्थना कक्ष, सामुदायिक केंद्र, पुस्तकालय, बच्चों का पार्क और एम्फीथिएटर है। नींव के पत्थरों पर सेंसर लगाए गए हैं जो शोध के लिए कंपन, दबाव, हवा की गति और अन्य प्रकार के डेटा प्रदान करेंगे। गुजरात और राजस्थान के 2000 कारीगरों ने 3 साल में 402 सफेद संगमरमर के खंभे तैयार किए। अन्य मूर्तियाँ भी बनाई गईं। अबू धाबी में मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में है। 700 करोड़ रुपए की लागत वाले इस मंदिर में किसी भी लोहे या स्टील का इस्तेमाल नहीं किया गया है। स्वयंसेवक योगेश ठक्कर ने बताया कि खंभों से लेकर छत तक नक्काशी की गई है। भारत से 700 कंटेनरों में 20,000 टन से अधिक पत्थर, संगमरमर भेजा गया है।