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अमेरिकी पायलट को बचाने वाली सील टीम सिक्स, ‘ओसामा किलर’ का ईरान में कमाल, तेहरान की घटना से ही हुआ था गठन


अमेरिका ने ईरान में एक जोखिम भरा बचाव अभियान में F-15E विमान से उतरे क्रू सदस्य को सुरक्षित निकाला है। रविवार सुबह दक्षिण-पश्चिम ईरान में जाग्रोस पहाड़ों की ऊबड़-खाबड़ घाटियों में अमेरिकी कमांडो ने अपनी एयरफोर्स के घायल अफसर तक पहुंच बनाई और उसको वापस लाए। माना जा रहा है कि इस ऑपरेशन को अमेरिका नेवी सील टीम-6 ने अंजाम दिया गया। इस यूनिट को इसी तरह से मुश्किल ऑपरेशन करने के लिए जाना जाता है। सील टीम-6 ने ही साल 2011 में पाकिस्तान में अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को विशेष ऑपरेशन में मार गिराया था।
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, सील टीम ने ओसामा को मारने से लेकर दुनिया के कई हिस्सों में ऑपरेशन किए हैं लेकिन ईरान के इसका एक दिलचस्प जुड़ाव रहा है। इस टीम के बनने की जड़ें 1980 में अमेरिकी विशेष बलों के ईरान से अमेरिका के बंधकों को छुड़ाने के असफल प्रयास से जुड़ी हैं। यह घटना 1979 में उस समय हुई थी, जब ईरान में इस्लामिक शासन आया और अमेरिका समर्थित उस राजशाही को सत्ता से बेदखल कर दिया। इस घटना के बाद इस टीम का गठन हुआ और अब ईरान में उसने एक अहम अभियान को अंजाम दिया।
F-15 क्रू को बचाने का मिशन – सील टीम सिक्स को अक्सर ऐसे मिशनों के लिए चुना जाता है, जैसा मिशन ईरान मे ंकिया गया है। सील टीम-6 अमेरिकी नेवी की मुख्य स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स हैं, जिन्हें सभी वातावरणों में काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। यूएस नेवी की वेबसाइट कहती है कि ये टीमें कठिनाइयों से तपकर बनी हैं।
सील टीम की शुरुआत जड़ें ईरान से अमेरिका समर्थित शाह पहलवी के शासन के गिरने और इस्लामिक शासन से आने से जुड़ी हैं। ईरान में 1979 से 1981 तक करीब 444 दिनों का गतिरोध चला था। इसमें तेहरान में 52 अमेरिकी राजनयिकों और नागरिकों को बंधक बनाना शामिल है। अमेरिकियों को बंधक बनाकर ईरानी मांग कर रहे थे कि गद्दी से हटाए गए पहलवी को वापस भेजा जाए ताकि उन पर मुकदमा चलाया जा सके।
क्यों बनी सील टीम – अमेरिका ने बंधकों को छुड़ाने के लिए साल 1980 में ऑपरेशन ईगल क्लॉ नाम से रेस्क्यू ऑपरेशन लॉन्च किया। यह अभियान बुरी तरह फेल हुआ, जब एक हेलीकॉप्टर C-130 परिवहन विमान से टकरा गया। इसमें आठ अमेरिकी सैनिक मारे गए और सेना को पीछे हटना पड़ा। ऐसे में 52 बंधक एक साल तक कैद में रहे और कूटनीतिक प्रयासों से उनकी रिहाई संभव हो पाई। इसके बाद अमेरिका ने ऐसी यूनिट बनाने का फैसला लिया, जो खतरनाक मिशन अंजाम दे सके।
1980 में बनी सील टीम सिक्स प्रशासनिक रूप से अमेरिकी नेवी की एक यूनिट है लेकिन इसका परिचालन नियंत्रण ज्वाइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के अधीन होता है। इसे एक टियर वन स्पेशल मिशन यूनिट माना जाता है, जो आर्मी की डोल्टा के बराबर है। इस टीम का सदस्य बनने के लिए एक मुश्किल चयन और ट्रेनिंग प्रोग्राम से गुजरना पड़ता है। इस टीम के कमांडो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों और हर मौसम में काम करने के लिए जाने जाते हैं।
ईरान में पूरा हुआ सील टीम का चक्र – अमेरिका की इस यूनिट के सबसे मशहूर ऑपरेशन में 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मार गिराना शामिल है। इससे पहले 2009 में सोमाली समुद्री लुटेरों से कैप्टन रिचर्ड फिलिप्स को इसी टीम ने बचाकर सुर्खी बटोरी थी। इस तरह के मिशनों ने इस यूनिट को अमेरिका की सबसे मशहूर, ताकतवर और सबसे कम जांच-पड़ताल वाली सैन्य संस्थाओं में से एक बना दिया है।
अमेरिका की सील टीम ने इराक, अफगानिस्तान और कई देशों में खतरनाक ऑपरेशन किए हैं। कैप्टन फिलिप्स को बचाने की घटना पर 2013 में फिल्म बन चुकी है। इस टीम पर कई डॉक्यूमेंट्री भी आ चुकी हैं। हालांकि सार्वजनिक तौर पर इस टीम के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी कभी नहीं दी गई है। ईरान की वजह से बनी इस यूनिट का हालिया ऑपरेशन के साथ ईरान में एक चक्र पूरा हुआ है।