
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर आबादी का लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। 2031 तक NCR की आबादी लगभग 7 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि एनसीआर की शहरी आबादी में तय मानकों के हिसाब से डिवेलपमेंट पहुंचाने की प्लानिंग एक बड़ी चुनौती बन सकती है। मौजूदा समय में दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा जैसे शहर IT, बिजनेस, जॉब और इंडस्ट्री के बड़े सेंटर बन चुके हैं। जिनका विस्तार लगातार जारी है।
एनसीआरपीबी (राष्ट्रीय राजधानी एरिया प्लानिंग बोर्ड) के 2041 के मसौदे के हिसाब से वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर NCR की आबादी 5.81 करोड़ थी, जो 2031 तक लगभग 7 करोड़ और 2041 तक बढ़कर करीब 11 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। जिसमें शहरी आबादी 2031 तक लगभग 57% और 2041 तक लगभग 67% होगी। उसी लिहाज से एनसीआरपीबी डिवेलपमेंट का खाका खींच रही है।
झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तार हो रहा
ट्रैफिक जाम, एयर पल्यूशन, जल संकट और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याएं गंभीर हो रही हैं। अनियोजित कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ियों का विस्तार हो रहा है। रोजगार के अवसरों की तुलना में अधिक जनसंख्या होने से बेरोजगारी और अन ऑर्गनाइज्ड एरिया में काम करने वालों की संख्या बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो NCR अगले 5 साल बाद दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल हो सकता है।
बेहतर जिंदगी के लिए NCR में पलायन
NCR में हरियाणा के 14 (गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, नूंह, रोहतक, रेवाड़ी, झज्जर, पलवल, भिवानी, महेंद्रगढ़, जींद, करनाल और चरखी दादरी), उत्तर प्रदेश के S (गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा / ग्रेटर नोएडा), मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर) और राजस्थान के 2 जिले (अलवर और भरतपुर) हैं। यहां बाहरी राज्यों से लोगों का लगातार पलायन हो रहा है। एनसीआरपीबी के मसौदे के अनुसार, 2031 तक NCR की लगभग 57 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी, जो 2041 तक बढ़कर 67 प्रतिशत तक होने की संभावना है।
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