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अब उमस से बनेगी 24 घंटे बिजली, तोड़े सोलर और विंड एनर्जी के रिकॉर्ड, नमक और जिलेटिन से बनाया जनरेटर


अब हवा में मौजूद उमस, या कहें कि ह्यूमिडिटी, से लगातार बिजली बनाई जा सकेगी। नमक और जिलेटिन से बने एक खास जनरेटर ने सोलर और विंड एनर्जी के भी सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस जनरेटर की खासियत है कि यह किसी महंगे धातू या केमिकल से नहीं बना और इस्तेमाल के बाद पर्यावरण में जहर भी नहीं फैलाता।
उमस से बनेगी बिजली – सूरज की रौशनी और हवा से बिजली बनाने के बारे में आपने सुना होगा लेकिन अब वैज्ञानिकों ने हवा में मौजूद उमस से बिजली बनाने का तरीका खोज निकाला है। लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी, वारविक यूनिवर्सिटी और इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने मिलकर मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर (MEG) बनाया है। इस जनरेटर की खासियत है कि यह हवा में मौजूद नमी और शरीर की उमस को सोखकर 24 घंटे बिजली बना सकता है। इस डिवाइस की एक और खासियत है कि इसे किसी महंगे मटेरियल से नहीं बल्कि साधारण नमक, जिलेटिन और एक्टिवेटेड कार्बन से बनाया गया है।
तोड़े सोलर और विंड एनर्जी के रिकॉर्ड – वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया यह छोटा सा जनरेटर सोलर और विंड एनर्जी के भी रिकॉर्ड तोड़ने में कामियाब रहा। दरअसल यह जनरेटर सिर्फ हवा की नमी से लगातार 30 दिन से ज्यादा लगभग 1 वोल्ट बिजली पैदा कर पाया। इस तरह के कई जनरेटर्स को एक साथ जोड़ने पर सेटअप ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए पूरे 90 वोल्ट का करंट पैदा किया, जो कि 40 एलइडी लाइटों को जलाने के लिए काफी है।
इस तकनीक ने इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए खतरनाक समझे जाने वाली ह्यूमिडिटी यानी कि उमस को एक बेहतरीन और कभी न खत्म होने वाले पावर सोर्स में बदल दिया है।
कैसे काम करता है अनोखा जनरेटर? – इस जनरेटर को बनाते समय पर्यावरण का खास तौर पर ध्यान रखा गया है। दरअसल जब नमक और जिलेटिन के घोल को सुखाया जाता है, तो वह खुद ब खुद तीन परतों वाली एक संरचना में बदल जाता है।
यह संरचना जैसे ही हवा में मौजूद उमस या इंसानी त्वचा के संपर्क में आती है, तो नमी को सोंख लेती है। मनी के मिलते ही इसमें नमक के आयन तेजी से दौड़ने लगते हैं और इस हलचल से बिजली पैदा होती है। इस जनरेटर की खासियत है कि इसके लिए किसी भारी मशीनरी या महंगे केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती।(REF.)
करेगा स्मार्ट हेल्थ सेंसर का भी काम – यह डिवाइस बिजली बनाने के अलावा एक एक स्मार्ट हेल्थ सेंसर की तरह भी काम कर सकता है। इसकी मदद से सांस लेते के पैटर्न को रियल टाइम में ट्रैक किया जा सकता है। इतना ही नहीं यह बोलते समय मुंह से निकलने वाली भाप की नमी से शब्दों को पहचान सकता है।
इसके अलावा इसे बिना छुए सिर्फ उंगली के पास आने से ही एक टचलेस सेंसर की तरह काम लिया जा सकता है। जब इसका काम खत्म हो जाए, तो इसे फेंकने से यह पर्यावरण को प्रदूषित भी नहीं करता। आम बैटरी की तरह यह पर्यावरण में जहर नहीं फैलाता। कहने का मतलब है कि यह आम बैटरी की तरह जहरीला कचरा नहीं बनाता।