
जब किसी रिश्ते में धोखा मिलता है, तो ऐसा लगता है जैसे दुनिया की हर खुशी उसके आगे फीकी पड़ गई हो। इंसान खुश रहना भूल जाता है और अंदर ही अंदर खुद को ही दोष देने लगता है। उसे लगता है कि शायद उसी के अंदर कोई कमी रही होगी। लेकिन वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज ने अपने एक सत्संग में धोखा मिलने पर दुखी होने के बजाय खुश रहने की बात कही है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर महाराज ने ऐसा क्यों कहा? आइए जानते हैं उनके इस विचार के पीछे क्या तर्क है और आखिर धोखा मिलने पर दुखी नहीं, बल्कि खुश क्यों होना चाहिए।
धोखा देने वाले को धन्यवाद देकर खुश हो जाइए – प्रेमानंद जी कहते हैं कि अगर इस दुनिया में किसी से आपको धोखा मिल गया है, तो उस इंसान से नफरत करने या बदला लेने के बजाय उसका धन्यवाद करें। उनका मानना है कि उस इंसान ने धोखा देकर अपना असली चेहरा दिखा दिया। अगर उसकी यह सच्चाई देर से आपके सामने आती, तो आपका दुख और भी बड़ा होता। इसलिए इस धोखे को अपने फ्यूचर के लिए अच्छा ही मान लेना चाहिए।
धोखा आपको भ्रम से बाहर निकालता है, ये भगवान की कृपा है – महाराज जी बताते हैं कि सबसे बड़ा दुख धोखा मिलने का नहीं, बल्कि उस भ्रम के टूटने का होता है जिसमें हम किसी को अपना सब कुछ मान बैठे होते हैं। जब वही व्यक्ति विश्वास तोड़ता है, तब सच्चाई सामने आती है। उनके अनुसार, यह घटना आपको हकीकत से रूबरू कराती है और आगे की लाइफ में सही लोगों की पहचान करना सिखाती है।
धोखे में भी छिपी होती है भगवान की कृपा – महाराज जी का कहना है कि हर घटना के पीछे भगवान की कोई न कोई इच्छा होती है। अगर किसी ने आपका भरोसा तोड़ा है, तो हो सकता है भगवान आपको उससे होने वाले बड़े नुकसान से बचा रहे हों। इसलिए धोखे को सिर्फ दर्द की तरह नहीं, बल्कि भगवान की कृपा की तरह भी देखना चाहिए, जिसने समय रहते सच्चाई दिखा दी।
धोखा मिलने के बाद क्या करें और क्यों बदले की भावना न रखें? – प्रेमानंद जी कहते हैं कि अगर आपको धोखा मिल ही गया है, तो सबसे पहले भगवान पर पूरा भरोसा रखें कि वह आपका भी भला करेंगे। फिर उनसे प्रार्थना करें, “हे भगवान जिस इंसान ने मुझे धोखा दिया है, उसकी बुद्धि शुद्ध कर दीजिए और उसका भी कल्याण कीजिए।” उनका कहना है कि जब आप ऐसा कहते हैं, तो सामने वाले का भला हो या न हो, आपका भला जरूर होता है।
बदला लेने की भावना न रखें – प्रेमानंद जी के अनुसार, जिसने आपको धोखा दिया है, उसे सबक सिखाने या बदला लेने में अपनी एनर्जी बर्बाद न करें। ऐसे व्यक्ति से चुपचाप दूरी बना लें और उसे उसके हाल पर छोड़ दें। उनका मानना है कि जो इंसान किसी का विश्वास तोड़ता है, उसे अपने कर्मों का फल एक न एक दिन जरूर मिलता है। इसलिए उसके लिए मन में न गुस्सा रखें और न ही बदले की भावना। भगवान पर भरोसा रखें, क्योंकि न्याय करने का काम आखिरकार उन्हीं का है।
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