
ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज संकट के बीच भारत के ऑटोमोबाइल डीलर असोसिएशन का महासंघ (FADA) अगर ये बताए कि इस दौरान लोग रेकॉर्ड संख्या में कार और बाइक खरीद रहे हैं तो इसे कैसे समझा जाए। समझदार लोग तो यही कह रहे हैं कि क्राइसिस जेनुइन है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई पर असर हुआ है। मंदी की आशंकाएं जताई जा रही हैं। सप्लाई चेन पर असर हुआ है। भारत में विपक्ष के एक बड़े नेता ने तो यहां तक कहा है कि इस संकट के कारण आर्थिक सुनामी आने वाली है और सरकार के अंतिम दिन शुरू हो गए हैं।
आंकड़ों ने चौंकाया – तो जब इतनी ‘बड़ी क्राइसिस’ आई हुई हो तो किसी परिवार या आदमी का स्वाभाविक रिएक्शन क्या होना चाहिए? यही न कि संकट के लिए तैयार रहो और बड़ा खर्च न करो। पता नहीं कब कैश की जरूरत पड़ जाए। गैर-जरूरी कर्ज मत लो क्योंकि पता नहीं चुकाने की क्षमता बचे या न बचे। बैंकों का रुख भी यही होना चाहिए कि खुलकर कर्ज मत बांटो, पता नहीं लोग लौटा पाएंगे या नहीं? कंपनियों को भी उत्पादन कम करना चाहिए क्योंकि पता नहीं कि डिमांड पर कैसा असर हो। लेकिन हुआ बिल्कुल इसका उल्टा यानी बिक्री बढ़ गई।
कार-SUV में जबरदस्त ग्रोथ – जून 2026 भारतीय ऑटो रिटेल इतिहास का अब तक का सबसे बेहतरीन महीना रहा। इस महीने कुल साढ़े पच्चीस लाख से अधिक गाड़ियां रजिस्टर हुईं, जो पिछले साल के जून की तुलना में लगभग 22% की मजबूत ग्रोथ है। पैसेंजर गाड़ियां यानी कार-SUV आदि ने 28% से ज्यादा ग्रोथ के साथ सबसे तेज बढ़त दर्ज की। जून में इनकी बिक्री चार लाख दस हजार से ज्यादा रही। इनके अलावा दोपहिया (21%), कमर्शल गाड़ियों (17%), थ्री-व्हीलर्स (16%) और ट्रैक्टर्स (25%) ने भी शानदार ग्रोथ दिखाई।
डीलर आशावान – ऑल्टरनेटिव फ्यूल यानी वैकल्पिक ईंधनों से चलने वाली गाड़ियों ने नया रेकॉर्ड बनाया। पहली बार कार-SUV सेग्मेंट में CNG, हाइब्रिड और EV की हिस्सेदारी 40% के पार पहुंची, जबकि दोपहिया सेग्मेंट में EV शेयर भी पहली बार 10% से अधिक रहा। डीलरों का सर्वे बता रहा है कि उनमें से ज्यादातर आने वाले समय में बिक्री को लेकर आशावान हैं। सिर्फ 7% को लगता है कि बिक्री घट भी सकती है।
घरेलू फैक्टर – दिलचस्प यह है कि भारत में जून में चार लाख से ज्यादा लोगों ने कार खरीदी और 18 लाख से ज्यादा ने दोपहिया वाहन, ये हुआ कैसे? इसके कई कारण हो सकते हैं। भारतीय बाजार की गति काफी हद तक घरेलू फैक्टर जैसे लोगों की आमदनी, रोजगार, बढ़ती रूरल डिमांड और आसान लोन से तय हो रही है। यह मध्य वर्ग का भारत की ग्रोथ स्टोरी के पक्ष में मतदान है।
स्केल बढ़ा तो लागत घटेगी – एक वजह यह भी हो सकती है कि कार-बाइक आदि अब रोजगार, शिक्षा और रोजमर्रा के लिए ट्रांसपोर्ट के जरूरी साधन हैं, इसलिए वैश्विक तनाव के बावजूद इनकी मांग बनी रही। यह भी संभव है कि लोगों ने माना कि ये संकट लंबा नहीं चलेगा और इस मामले में वे ज्यादातर जानकारों से अलग आकलन कर पाए हों। भारत ऑटो मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है और यहां बनी कार और बाइक ग्लोबल मार्केट में जा रही है। जून का आंकड़ा भरोसा दिला रहा है कि घरेलू मांग मजबूत है। ऑटो कंपनियां चाहें तो मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी बढ़ा सकती हैं। स्केल बढ़ने के साथ ही भारत में कार और बाइक बनाने की लागत कम होगी, टेक्नॉलजी लाने की कंपनियों की कैपिसिटी बढ़ेगी और यहां के प्रॉडक्ट दुनिया में बेहतर करेंगे।
EV की मजबूत मांग – ये भी अच्छा हुआ है कि लोग तेजी से वैकल्पिक ईंधनों से चलने वाली गाड़ियों की ओर जा रहे हैं। खासकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती मांग बता रही है कि इस सेक्टर का भविष्य कैसा है। भारत बिजली का सरप्लस उत्पादन करता है। अगर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग में तेजी लंबे समय तक रही तो विदेशी तेल और गैस पर भारत की निर्भरता भी कम होगी।
Home / Business & Tech / कैसा क्राइसिस: टॉप गेयर में मार्केट, जमकर लोन बांट रहे बैंक, गाड़ियों की रेकॉर्ड बिक्री
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