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गौतम अडानी पर लगे आपराधिक आरोप क्यों हटाए गए? अमेरिकी कोर्ट में DoJ का बड़ा खुलासा, जानिए 6 बड़े कारण


अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने अमेरिकी अदालत में बताया है कि उसने उद्योगपति गौतम अडानी और सात अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को कानूनी और व्यावहारिक कारणों की वजह से वापस लिया। DoJ ने ऐसे 6 कारण बताए हैं। विभाग का कहना है कि इस मामले में निवेशकों को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ था और आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत भी नहीं थे। इसके अलावा, इस केस से भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव बढ़ने की आशंका भी थी।
अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने DoJ से पूछा था कि जब मामला वापस लिया जा रहा है तो इसे स्थायी रूप से क्यों बंद किया जाए। जज ने पहले दाखिल किए गए आवेदन को ‘अस्पष्ट’ बताया था। इसके जवाब में DoJ ने 10 पन्नों का विस्तृत हलफनामा दाखिल किया।
DoJ ने क्या कहा? – न्याय विभाग ने अदालत से कहा कि इस मामले में किसी निवेशक को कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। ऐसे में आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई खास मतलब नहीं था। विभाग ने यह भी कहा कि अगर मुकदमा चलता भी, तो किसी को मुआवजा नहीं मिल सकता था क्योंकि नुकसान हुआ ही नहीं था।
पिछली सरकार पर भी उठाए सवाल – DoJ ने दावा किया कि यह मामला पिछली अमेरिकी सरकार के अंतिम दिनों में जल्दबाजी में दर्ज किया गया था। विभाग के अनुसार, इसका उद्देश्य सिर्फ आरोप लगाकर लोगों की छवि खराब करना था, जबकि मुकदमे को आगे बढ़ाने की वास्तविक संभावना बहुत कम थी।
इन 6 कारणों से बंद हुआ मामला? – DoJ ने बताया कि कई महीनों तक दस्तावेजों की जांच और बचाव पक्ष के वकीलों से बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। विभाग ने 6 प्रमुख वजहें गिनाईं:
कथित घटनाएं पूरी तरह भारत में हुई थीं।
भारतीय एजेंसियों ने जांच में कोई गड़बड़ी नहीं पाई।
निवेशकों को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ।
जरूरी गवाह और सबूत विदेशों में थे, जिन्हें जुटाना आसान नहीं था।
आरोपियों के अमेरिकी अदालत में पेश होने की संभावना बेहद कम थी।
मामला अमेरिकी कानून के क्षेत्राधिकार की शर्तों पर पूरी तरह फिट नहीं बैठता था।
170 करोड़ रुपये में केस का निपटारा – इससे पहले गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के साथ जुड़े सिविल मामले को निपटाने के लिए 1.8 करोड़ डॉलर (करीब 170 करोड़ रुपये) का भुगतान करने पर सहमति जताई थी। यह मामला अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड से जुड़े कुछ कथित भ्रामक बयानों से संबंधित था।
किन लोगों के नाम थे? इस मामले में गौतम अडानी के अलावा सागर अडानी, विनीत जैन, रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबनेस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल के नाम भी शामिल थे।
नवंबर 2024 में आरोप लगने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों और मार्केट वैल्यू में बड़ी गिरावट आई थी। हालांकि, मई 2025 में DoJ द्वारा मामला वापस लेने के बाद समूह के शेयरों में तेजी लौटी। इसके बाद अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बिक्री के जरिए 15,000 करोड़ रुपये जुटाए और 11.5 अरब डॉलर की लागत वाले एक बड़े एल्युमिनियम प्लांट की परियोजना पर भी समझौता किया।