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बेफ्रिक होकर उड़ाते हैं धुएं के छल्ले तो हो जाएं सावधान, जोड़ों के लिए खतरनाक ये आदत, अर्थराइटिस की वजह


कुछ लोग टेंशन और दिमाग की थकान को दूर करने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में सिगरेट पीते हैं। सिगरेट पीने वाले ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह ही टेंशन को दूर करने का सबसे सरल उपाय है। लेकिन, जानकार बताते हैं कि बात-बात पर सिगरेट के छल्ले उड़ाना आपके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। इसके प्रभाव से प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कार्यों में दबाव पड़ता है, जो अर्थराइटिस की वजह बन सकता है।
स्मोकिंग से अर्थराइटिस का जोखिम (Designed By Magnific) – आज के दौर में ऑफिस के टारगेट को पूरा करने की टेंशन लगभग हर व्यक्ति में रहती है। हालांकि, इस टेंशन को दूर करने के लिए ज्यादातर लोग सिगरेट का सहारा लेते हैं। यह आदत भले ही उन लोगों को थोड़ा समय के लिए रिलैक्स अवश्य कर दें। लेकिन, बार-बार और लंबे समय तक स्मोकिंग करने से शरीर में सूजन ट्रिगर हो सकती है, जो आगे चलकर प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करके ऑटोइम्यून रोग जैेसे रूमेटाइड अर्थराइटिस का कारण बन सकती है। यह एक गंभीर रोग है जो हड्डियों के जोड़ों को प्रभावित करता है। इसमें व्यक्ति को रोजाना के काम करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्मोकिंग कैसे बढ़ाती है रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा? – विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट के धुएं में मौजूद हजारों रसायन शरीर में सूजन बढ़ाने वाले इम्यून रिस्पॉन्स को सक्रिय कर सकते हैं। एनसीबीआई की स्टडी के अनुसार धूम्रपान फेफड़ों में ऐसी बायोलॉजिकल प्रक्रियाएं शुरू करता है जो ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया को बढ़ावा देती हैं।
सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने पर शरीर में कुछ प्रोटीन “सिट्रुलिनेटेड” (Citrullinated) हो जाते हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली इन बदले हुए प्रोटीनों को बाहरी तत्व समझकर उन पर हमला करने लगती है। यही प्रक्रिया रूमेटाइड अर्थराइटिस के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जेनेटिक कारणों के साथ बढ़ जाता है जोखिम – जेएमए जरनल के अनुसार हर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को रूमेटाइड अर्थराइटिस नहीं होता। हालांकि जिन लोगों में कुछ विशेष आनुवंशिक (Genetic) बदलाव मौजूद होते हैं, उनमें जोखिम काफी बढ़ जाता है। विशेष रूप से HLA-DRB1 जीन के कुछ वेरिएंट्स और स्मोकिंग आपस में मिलकर रूमेटाइड अर्थराइटिस के जोखिम को कई गुना बढ़ा सकता है। स्टडी में पाया गया कि स्मोकिंग और आनुवंशिक जोखिम कारक मिलकर रूमेटाइड अर्थराइटिस की संभावना को काफी बढ़ा सकते हैं। ऐसे में आप स्मोकिंग से बचने पर विचार कर सकते हैं।
धूम्रपान करने वालों में लक्षण हो सकते हैं ज्यादा गंभीर? – नेशनल रूमेटाइड अर्थराइटिस सोसाइटी के अनुसार सिगरेट या धूम्रपान केवल रूमेटाइड अर्थराइटिस का जोखिम नहीं बढ़ाता, बल्कि धूम्रपान रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षणों को भी अधिक गंभीर बना सकता है। इससे मरीज को आगे बताए लक्षण महसूस हो सकते हैं।
जोड़ों का नुकसान तेजी से बढ़ सकता है।
सूजन अधिक हो सकती है।
दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है।
दवाओं का असर कम हो सकता है।
विकलांगता का जोखिम बढ़ सकता है।
कौन से लक्षण दिख सकते हैं? – एनआईएच के अनुसार रूमेटाइड अर्थराइटिस के शुरुआती लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं। कई बार मरीज इन्हें सामान्य थकान या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके शुरुआती लक्षण आगे बताए गए हैं।
हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों में दर्द – जोड़ों में सूजन, गंभीर लक्षण में जोड़ों के आकार में बदलाव
लगातार थकान और गंभीर लक्षण में चलने में परेशानी होना
कमजोरी महसूस होना
हल्का बुखार
पकड़ कमजोर होना
घुटनों, कोहनियों और कंधों में तेज दर्द होना।
स्मोकिंग छोड़ने से क्या फायदा हो सकता है? – स्टडी बताती हैं कि धूम्रपान छोड़ने से रूमेटाइड अर्थराइटिस का जोखिम धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि जोखिम पूरी तरह खत्म होने में कई वर्ष लग सकते हैं, लेकिन धूम्रपान छोड़ना बीमारी की प्रगति को धीमा करने और उपचार की सफलता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
धूम्रपान को छोड़ने से आपको फेफड़ों, सांस और ऑटोइम्युन रोग होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। इससे बचने के लिए आप नियमित व्यायाम करें और हेल्दी डाइट का सेवन करें। इसके अलावा, यदि आपको जोड़ों या बोन हेल्थ से जुड़े लक्षण महसूस हो रहे हों तो उन्हें अनदेखा न करें। समय पर पहचान और धूम्रपान छोड़ने का फैसला आपके जोड़ों और समग्र स्वास्थ्य दोनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।