
हाल के वर्षों में युवाओं के बीच ई-सिगरेट या वेपिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। आकर्षक डिजाइन, विभिन्न फ्लेवर और सोशल मीडिया पर इसके प्रचार ने इसे युवाओं के बीच लोकप्रिय बना दिया है। हालांकि, कई लोग इसे सामान्य सिगरेट की तुलना में सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध इससे जुड़े कई स्वास्थ्य जोखिमों की ओर संकेत करते हैं और बताते हैं कि यह ब्रेन और फेफड़ों को डैमेज कर सकती है।
बाजार में नई चीजें युवाओं के बीच अक्सर लोकप्रिय बन जाती हैं। बीते कुछ वर्षों से सिगरेट पीने वाले लोगों के बीच ई-सिगरेट यानी वेपिंग का क्रेज बढ़ा है। सोशल मीडिया पर लोग जमकर वेपिंग का इस्तेमाल करते दिखते हैं। यही वजह है कि युवाओं में भी वेेपिंग का उपयोग बढ़ा है। ई सिगरेट अलग-अलग आकर्षक डिजाइन, अलग-अलग तरह के फ्लेवर में उपलब्ध होती है। वहीं डब्लूएचओ के आंकड़ों पर नजर डाले तो पता चलता है कि भारत में करीब 267 मिलियन वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। जिसमें स्मोकिंग को भी शामिल किया जाता है। इसकी वजह से लंग्स डिजीज, कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। इन रोगों के चलते भारत में हर साल करीब 1.35 मिलियन लोग अपनी जान गंवा देते हैं। ऐसे में युवाओं के बीच ई-सिगरेट का बढ़ता चलन एक चिंता का विषय हो सकता है। फिलहाल, आगे जानतेे हैं कि ई-सिगरेट से सेहत को क्या नुकसान होते हैं?
ई-सिगरेट कैसे काम करती है? – ई-सिगरेट एक बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो एक विशेष लिक्विड को गर्म करके एरोसोल (वाष्प) बनाता है। इस लिक्विड में आमतौर पर निकोटीन, फ्लेवरिंग एजेंट और अन्य रासायनिक पदार्थ मौजूद होते हैं। उपयोगकर्ता इस एरोसोल को सांस के जरिए अंदर लेता है, जिसे वेपिंग कहा जाता है। बहुत से लोग मानते हैं कि ई-सिगरेट में तंबाकू नहीं जलता, इसलिए यह सुरक्षित है। हालांकि, सीडीसी के अनुसार वेपिंग के दौरान निकलने वाले एरोसोल में कई हानिकारक रसायन और अल्ट्राफाइन कण मौजूद हो सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं।
युवा मेंं ई सिगरेट के नुकसान (Designed By Magnific) – लंग्स हमारे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति ई-सिगरेट का उपयोग करता है तो उसके लंग्स में भाप के साथ में कई तरह के कैमिकल्स भी पहुंचते हैं। इनमें फॉर्मल्डिहाइड, एक्रोलिन और हैवी मेटल्स के सूक्ष्म कण शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकन लंग एसोसिएशन के अनुसार, ई-सिगरेट का एरोसोल फेफड़ों में सूजन पैदा कर सकता है और समय के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में वेपिंग से जुड़ी गंभीर फेफड़ों की चोट (EVALI – E-cigarette or Vaping Associated Lung Injury) भी हो सकती है, जिसके कारण अस्पताल में भर्ती होने की नौबत तक आ सकती है।
लंग्स में सूजन आना – एनसीबीआई के अनुसार ई-सिगरेट से निकलने वाले एरोसोल फेफड़ों की कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। इससे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है और सूजन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। स्टडी के अनुसार, नियमित वेपिंग करने वाले लोगों में फेफड़ों की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
युवा मेंं ई सिगरेट के नुकसान (Designed By Magnific) – ई-सिगरेट का उपयोग करने वाले युवाओं में सांस से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती है। वेपिंग करने वालों में लगातार खांसी, गले में जलन, सांस फूलना और घरघराहट (Wheezing) जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जॉन्स हॉपकिंग्स की स्टडी के अनुसार जो किशोर नियमित रूप से ई-सिगरेट का उपयोग करते है, उनमें ब्रोंकाइटिस जैसे लक्षण विकसित होने की संभावना अधिक होती है। फेफड़ों में लगातार सूजन होने के कारण सांस लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
निकोटीन की लत से ब्रेन को पहुंचता है नुकसान – युवाओं में ई-सिगरेट के बढ़ते उपयोग का सबसे बड़ा कारण इसमें मौजूद निकोटीन है। निकोटीन एक अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है। किशोरावस्था और युवा अवस्था में मस्तिष्क का विकास जारी रहता है, इसलिए निकोटीन का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
अमेरिकी सर्जन जनरल की रिपोर्ट के अनुसार, निकोटीन ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, याददाश्त और सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, निकोटीन की लत भविष्य में अन्य तंबाकू उत्पादों के उपयोग का जोखिम भी बढ़ा सकती है।
ई-सिगरेट को अक्सर सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च इसके कई संभावित खतरों की ओर इशारा करते हैं। यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है, सांस संबंधी समस्याएं बढ़ा सकती है, निकोटीन की लत लगा सकती है और युवाओं के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकती है। इसलिए युवाओं और उनके अभिभावकों को ई-सिगरेट से जुड़े जोखिमों के बारे में जागरूक होना चाहिए।
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