
कुछ लोगों को पहली मुलाकात में किसी से मिलने पर बेचैनी, घबराहट, शरीर का कंपकंपाना, दिल की धड़कन तेज होना और ऐसी ही कई अन्य परेशानी महसूस होती है।ऐसी परेशानियों को सामाजिक बेचैनी कहा जाता है। UNESCO में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक बेचैनी को मेडिकल टर्म में सोशल फोबिया या झेनोफोबिया कहा जाता है। अगर इस मानसिक परेशानी को इग्नोर किया जाए व्यक्ति की परेशानी धीरे-धीरे बढ़ सकती है। अगर यह सामाजिक बेचैनी ज्यादा बढ़ जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
कहीं आपको भी तो नहीं होती सामाजिक बेचैनी? (Designed by Magnific) – कभी-कभी किसी पहली मुलाकात से पहले हाथ कांपना, पसीने छूटना और बेचैनी शुरू होना? दिल की धक-धक तेज होना, गला सूखना और दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल सोचना- सामने वाला जज तो नहीं कर रहा मुझे? अगर ऐसे ख्याल आपको भी परेशान करते हैं, तो घबराएं नहीं। यह सब कोई असामान्य बात नहीं है। National Institute of Mental Health में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार बीते वर्ष यूएस में 7.1 प्रतिशत वयस्कों में इसी तरह की बेचैनी देखी गई है। अगर सामान्य शब्दों में समझें तो यह सामाजिक बेचैनी है। हालांकि भारत में मेंटल हेल्थ से जुड़े कई डेटा मौजूद हैं, लेकिन खासकर सामाजिक बेचैनी से जुड़ा कोई आधिकारिक डेटा नहीं है।
UNESCO के अनुसार सामाजिक बेचैनी (सोशल फोबिया) को क्लीनिकल टर्म में झेनोफोबिया भी कहते हैं। अब सवाल ये है कि आखिर झेनोफोबिया की समस्या क्यों हो सकती है? झेनोफोबिया के लक्षण क्या हैं और ऐसे ही कई सवालों के जवाब, जिससे आप इस समस्या से अवगत रहें।
पहली मुलाकात में होती है घबराहट! (Designed by Magnific) – किसी अनजान से या पहली बार मिलने पर कुछ लोग घबराहट महसूस करते हैं, जिसे सोशल फोबिया कहा जाता है। किसी नए व्यक्ति से मिलने पर पसीना आना या बेचैनी महसूस होना सामाजिक चिंता से जुड़े लक्षण हैं।NIMH की स्टडी के अनुसारऐसी स्थिति में व्यक्ति को ऐसा लगता है कि कहीं उनके द्वारा कोई ऐसी गलती ना हो जाए, जिससे उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो।
क्या हो सकते हैं झेनोफोबिया के लक्षण? – झेनोफोबिया की समस्या होने पर व्यक्ति अजनबियों या बाहरी लोगों से मिलने पर चिंता और मानसिक परेशानी महसूस करता है। कुछ लोगों को अजनबियों से मिलना या उनके बारे में बात करने से भी घबराहट महसूस होती। अब ऐसी समस्या कई बार लोगों के लिए बड़ी कठनाई का कारण भी बन सकती है। जैसे-
अजनबी के बारे में सोचते या मिलते ही दिल की धड़कन तेज़ हो जाना।
डर या किसी अनहोनी की आशंका महसूस होना।
सीने में दर्द महसूस होना।
मतली या उल्टी जैसा महसूस होना।
चक्कर आना।
सिरदर्द होना।
अचानक से पेशाब करने की इच्छा होना।
मांसपेशियों में दर्द महसूस होना।
उलझा हुआ महसूस होना।
कानों में सीटी जैसी आवाज सुनाई देना।
सांस लेने में कठिनाई महसूस होना।
ठंड लगना या कंपकंपी महसूस होना।
शरीर कांपने लगना।
घुटन जैसा महसूस होना।
अत्यधिक पसीना आना।
Harvard Health Publishing के अनुसार इसका कारण दिमाग के पीछे मौजूद एक हिस्से एमिग्डला को माना गया है। दरअसल जब दिमाग किसी असहज स्थिति या तनाव को महसूस करता है, तो एमिग्डला उसी समय हाइपोथैलेमस को मैसेज भेजता है। और तुरंत ही बॉडी का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है।NCBI की रिपोर्ट के अनुसारइसे फाइट या फ्लाइट प्रतिक्रिया कहते हैं। ऐसी स्थिति में एड्रेनालिन हार्मोन रिलीज होता है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो सकती है, व्यक्ति सांस भी तेजी से लेने लग सकता है और पसीना आना भी शुरू हो सकता है। अलग-अलग रिसर्च के अनुसार झेनोफोबिया की समस्या वर्षों पहले किसी बड़े खतरे के कारण देखी जाती थी, लेकिन अब ऐसी समस्या किसी नए इंसान से मिलने पर देखी जा रही है। और मेडिकल टर्म में इसे सामाजिक बेचैनी (सोशल फोबिया) को झेनोफोबिया का नाम दिया गया।
अगर ऐसी समस्या शुरू हो जाए तो व्यक्ति के जीवन पर क्या असर पड़ सकता है? – अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा घबराहट की समस्या शुरू हो जाए तो उसकी डेली लाइफ पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। NIHM की रिपोर्ट बताती है कि झेनोफिबिया की समस्या से पीड़ित व्यक्ति किसी नए व्यक्ति से मिलने से पहले, किसी इंटरव्यू से पहले, किसी के कुछ पूछने से पहले घबराहट या बेचैनी महसूस करने लगते हैं। अगर ऐसी स्थिति को नजरअंदाज किया जाए तो करियर, आत्मविश्वास और रिश्तों से जुड़ी परेशानी भी शुरू हो सकती है। वैसे यह ध्यान रखें कि कभी-कभी ऐसी स्थितियों को सामान्य माना गया है, लेकिन बार-बार ऐसा महसूस हो तो यह सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर का कारण बन सकता है।
इन मानसिक परेशानियों से कैसे बचें? – CDC और Harvard Health Publishing के अनुसार इन परेशानियों से बचने के लिए नीचे बताये गए तरीके मददगार हो सकते हैं। जैसे:
धीमी और गहरी सांस लेना शुरू करें ,ऐसा करने से बॉडी का रिलैक्सेशन सिस्टम एक्टिव होगा और दिल की धड़कन और घबराहट कम हो सकती।
पूरी नींद लें, रोजाना एक्सरसाइज या स्ट्रेस फ्री योगा करें और हेल्दी डाइट फॉलो करें।
धीरे-धीरे लोगों से मिलना शुरू करें।
ध्यान रखें कोई आपको जज नहीं करेगा।
अपनी परेशानियों को ऐसे लोगों के साथ साझा करें, जो आपकी भावनाओं को समझें।
अगर झेनोफोबिया की समस्या या सामाजिक बेचैनी ज्यादा परेशान करें तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट और काउंसलर की मदद लें। हेल्थ एक्सपर्ट्स आपको ऐसी स्थितियों का कैसे सामना करना है उसकी जानकारी देंगें और जरूरत पड़ने पर दवा भी दी जा सकती है। भारत में अभी भी सामाजिक बेचैनी या किसी अन्य मानसिक परेशानियों पर खुलकर बात करने से बचते हैं, जो इन परेशानियों के बढ़ने का कारण बन सकते हैं। इसलिए इन परेशानियों से खुद को दूर रखें और अन्य लोगों की भी मदद करें।
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