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54 साल पुराना गीत, जिसे खाली चाय के कप के साथ किया रिकॉर्ड, किशोर कुमार ने लगाई थी गजब ट्रिक, आज भी है हिट


किशोर कुमार भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री के एक ऐसे कोहिनूर रहे, जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ेगी। वह सुरों के ऐसे बादशाह रहे, जिन्होंने तरानों में योडलिंग को एक रूप में पेश किया और महारात हासिल की। उन्होंने हजारों सुपरहिट गाने दिए और अपनी जादुई आवाज से कई एक्टर्स को सुपरस्टार बनाया। किशोर कुमार का गाना गाने और रिकॉर्ड करने का स्टाइल भी एकदम अलहदा था। उनका मानना था कि गाने सिर्फ गाए नहीं जाते, बल्कि उन्हें जीया जाता है। तभी तो कभी वह किसी गाने को खाली चाय के कप के साथ गाते, तो किसी गाने को नाक के पास माचिस की डिब्बी रखकर। लेकिन यहां ‘संडे सिनेमा’ में आपको एक ऐसे गाने के बारे में बता रहे हैं, जिसे किशोर कुमार ने ठोड़ी पर दोनों हाथ रखे और सामने चाय का खाली कप रखकर गाया था। गाना इतना ब्लॉकबस्टर बना कि 54 साल बाद भी यह कानों में मिश्री घोल देता है और खूब हिट है।
बात साल 1972 की है। तब बासु चटर्जी ‘पिया का घर’ नाम से एक फिल्म बना रहे थे। इस फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था और आनंद बख्शी ने गानों के लिरिक्स लिखे थे। वैसे तो किशोर कुमार को इस फिल्म में दो गाने गाने थे। ये गाने थे- ये जीवन है, इस जीवन का, और दूसरा था-बंबई शहर की चल तुझको सैर करा दूं।
‘ये जीवन है, इस जीवन का’ गाने की रिकॉर्डिंग – अब किशोर कुमार ने ‘बंबई शहर की…’ गाना तो आसानी से गाकर रिकॉर्ड कर दिया, पर जब ‘ये जीवन है’ गाने की बात आई, तो मामला पेचीदा हो गया। वो इसलिए क्योंकि किशोर कुमार ने यह गाना जितनी बार भी और जिस भी तरह से गाया, वह लक्ष्मीकांत को पसंद नहीं आया। उन्हें इस गाने के लिए जो फील चाहिए था, वो आ ही नहीं रहा था।
बार-बार करते रहे रिहर्सल पर नहीं बनी बात- ऐसे में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने किशोर दा के साथ एक बार फिर बैठकर गाने की सिचुएशन को ठीक से समझने की कोशिश की। किशोर कुमार ने फिर तीन से चार बार गाने की रिहर्सल की, पर वो बात नहीं आई। किशोर दा कोशिश करते रहे, पर नाकामी मिलती रही। फिर थक-हारकर किशोर कुमार बैठ गए और एक कप चाय मंगवाई।
दाएं गाल पर दाहिना हाथ टिका पीने लगे चाय, तभी हुआ जादू – किशोर दा के साथ लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल भी चाय पीने बैठ गए और तभी जादू हो गया। किशोर कुमार ने अपने दाएं गाल पर दाहिना हाथ टिकाया और चाय पीते हुए धीरे-धीरे ‘ये जीवन है’ गाना गुनगुनाने लगे। वो अपनी धुन में मस्त होकर गुनगुना रहे थे, पर तभी लक्ष्मीकांत खुशी से चिल्लाए कि बस बिल्कुल ऐसे ही, ऐसे ही गाना है। यही अंदाज चाहिए था। किशोर दा हैरानी से देखने लगे, पर उन्होंने गाना एक पल के लिए भी बंद नहीं किया।
गालों पर हाथ टिकाए खाली चाय के कप के साथ रिकॉर्ड किया गाना – इसके बाद किशोर कुमार ने चाय की टेबल पर ही बैठे हुए, एक हाथ गाल पर रखे-रखे गाना पूरा किया और उसी चाय के कप के साथ सीधे रिकॉर्डिंग रूम में चले गए। हालांकि तब तक चाय खत्म हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने फ्लो बनाए रखने के लिए खाली कप हाथ में पकड़े रखा। वह रिकॉर्डिंग रूम के अंदर गए। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मेत पूरी म्यूजिक और रिकॉर्डिंग टीम फाइनल रिकॉर्डिंग के लिए तैयार हो गई। फिर किशोर कुमार ने कमाल कर दिया। जैसा सोचा था वैसा गाया और गाना जबरदस्त रिकॉर्ड हुआ।
एक ही टेक में पूरा गाना रिकॉर्ड – किशोर दा ने एक ही टेक में पूरा गाना रिकॉर्ड कर दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि ‘ये जीवन है’गाना गाते वक्त उन्होंने पूरे वक्त अपने ठोड़ी को दोनों हाथों पर टिकाए रखा था ताकि गाने कोबहुत ही कोमल और नाजुक अंदाज में रिकॉर्ड किया जा सके, जैसी कि डिमांड थी।