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‘मोदी 24 करोड़ लोगों के खिलाफ’, सिंधु जल पर अब मानवता की दुहाई क्यों दे रहा पाकिस्तान?


पाकिस्तान में सिंधु जल संधि को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। पाकिस्तान आरोप लगा रहा है कि भारत की वजह से देश सूखने की कगार पर पहुंच रहा है। सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानवीय बनाकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने ले जा रहा है। पाकिस्तानी अखबार ट्रिब्यून ने एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा है कि ‘नरेंद्र मोदी के भारत ने पानी जैसे अहम प्राकृतिक संसाधन को साझा करने के वादे वाले समझौते को छोड़कर 24 करोड़ से ज्यादा पाकिस्तानियों के खिलाफ एक नया कदम उठाया है।’
पाकिस्तानी अखबार ने लिखा है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने का फैसला कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक था। उसने लिखा है कि भारत के जल मंत्री सीआर पाटिल ने घोषणा की कि उनका देश यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि पाकिस्तान की ओर ‘पानी की एक बूंद भी’ न जाए।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय बैठक – पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया था। इसमें पाकिस्तान के शुभचिंतक कथित समाजसेवियों और कानूनी विशेषज्ञों को बुलाया गया था। इस दौरान पाकिस्तान के इन शुभचिंतकों ने भारत के खिलाफ जमकर बयानबाजी की। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि ‘पाकिस्तान नाजुक स्थिति में है।’ उन्होंने फिर से मानवता का हवाला दिया।
पाकिस्तानी मंत्रियों ने कहा ‘पानी हमारी जीवन रेखा है और हमारी ‘रेड लाइन’ भी।’ पाकिस्तानी मंत्रियों ने ये धमकी दी कि अगर भारत संधि को बहाल नहीं करता है तो देश युद्ध लड़ेगा। हैरानी की बात ये है कि अभी तक भारत ने पाकिस्तान का पानी रोका भी नहीं है लेकिन पाकिस्तानी नेताओं ने अपनी नाकामियों को भी भारत के मत्थे मढ़ना शुरू कर दिया है। जैसे पाकिस्तान में पानी स्टोर करने के लिए काफी कम डैम बनाए गये हैं और जो डैम हैं भी उनमें गाद भरा है। कुछ डैम से लाहौर के पानी माफिया ऊपर से ही पानी निकालकर कालाबाजारी करते हैं।
पाकिस्तान में कैसे गहरा रहा है जल संकट? – पाकिस्तान के ‘इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी’ (IRSA) के आंकड़ों के मुताबिक मराला हेडवर्क्स पर चिनाब नदी का प्रवाह 78,276 क्यूसेक से घटकर मात्र 1,527 क्यूसेक तक रह गया है।
IRSA के मुताबिक पाकिस्तान को भारत की तरफ से मिलने वाला औसत जल प्रवाह जो पहले 46,000–48,000 क्यूसेक हुआ करता था उसमें भारी गिरावट दर्ज की गई है।
सुकुर बैराज जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़ी नहरों में पानी का स्तर 38% से लेकर 82% तक गिर चुका है।
पाकिस्तान का आरोप है कि पानी की कमी के कारण सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे देश में खाद्य असुरक्षा का खतरा बढ़ गया है।
पाकिस्तान का कहना है कि मंगला और तारबेला जैसे बड़े हाइड्रोपावर डैमों में पानी का स्तर अत्यधिक नीचे चला गया है।
सिंध और बलूचिस्तान जैसे निचले प्रांत आरोप लगा रहे हैं कि पंजाब प्रांत अपने हिस्से से अधिक पानी का इस्तेमाल कर रहा है जिससे देश में अंदरूनी झगड़ा बढ़ गया है।
समझौते को ‘स्थगित’ करने का कानूनी आधार नहीं- पाकिस्तान – पाकिस्तान ने परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन (PCA) के इस व्याख्या का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने या रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन भारत ने इसके फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। इसको लेकर पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह ऐसा रुख नहीं है जिसे किसी गंभीर अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे में सही ठहराया जा सके लेकिन ऐसा लगता है कि भारत ने मान लिया है कि बातचीत से इनकार करने की कोई राजनीतिक कीमत नहीं चुकानी पड़ेगी।
पाकिस्तानी पहुंचे एक्सपर्ट्स ने कहा पाकिस्तान की तरफ से सीमा-पार आतंकवाद से निपटने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने के आधार पर संधि को रोकने की बात पानी के बंटवारे के समझौते में बाहरी मुद्दों को शामिल करने की एक साफ कोशिश है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को लगता है कि पाकिस्तान ने संधि का उल्लंघन किया है तो अनुच्छेद IX में विवाद सुलझाने का तरीका बताया गया है। हैरानी की बात ये है कि भारत ने अप्रैल 2025 में संधि रोके जाने से पहले कम से कम चार बार सिंधु जल समझौते पर फिर से बात करने की चिट्ठी भेजी थी लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया और अब पाकिस्तान रो रहा है।