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डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी 5 चीजें आंखों की दुश्मन, बढ़ाती है ग्लूकोमा के मरीजों की परेशानी


आंखों की एक गंभीर बीमारी है, जिसमें ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है। इस बीमारी से अंधापन होने पर व्यक्ति को कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में अक्सर इसके लक्षण महसूस नहीं होते। जब तक मरीज को धुंधला दिखाई देना या दृष्टि का दायरा कम होना महसूस होता है, तब तक आंखों को काफी नुकसान हो चुका होता है। अच्छी बात यह है कि समय पर इलाज, नियमित जांच और सही जीवनशैली अपनाकर बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है। लेकिन कई मरीज रोजमर्रा की कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उपचार के प्रभाव को कम कर सकती हैं। ऐसे में आगे जानते हैं उन गलतियों के बारे में जिनको ग्लूकोमा के मरीजों को तुरंत बदलने की सलाह दी जाती है।
ग्लूकोमा में व्यक्ति की जीवनशैली क्यों महत्वपूर्ण होती है? -एनसीबीआई के अनुसार ग्लूकोमा का इलाज केवल आई ड्रॉप्स या सर्जरी तक सीमित नहीं है। उपचार का उद्देश्य आंखों के अंदर के दबाव (Intraocular Pressure – IOP) को नियंत्रित रखना और ऑप्टिक नर्व को आगे होने वाले नुकसान से बचाना भी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मरीज दवाएं समय पर लेते हैं, नियमित जांच कराते हैं और अन्य बीमारियों जैसे हाई ब्लड प्रेशर एवं डायबिटीज को नियंत्रित रखते हैं, तो दृष्टि को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की संभावना बढ़ जाती है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थेमोलॉजी के अनुसार ग्लूकोमा के अधिकांश मरीजों को रोजाना आई ड्रॉप्स लेने की सलाह दी जाती है। इन दवाओं का उद्देश्य आंखों के अंदर का दबाव कम करना होता है। यदि मरीज समय पर आई ड्रॉप्स नहीं डालते, बार-बार डोज मिस करते हैं या अपनी मर्जी से दवा बंद कर देते हैं, तो आंखों का दबाव दोबारा बढ़ सकता है। इससे ऑप्टिक नर्व को स्थायी नुकसान होने का खतरा रहता है। दवा डालने का समय तय रखें और यदि कोई डोज छूट जाए तो डॉक्टर से पूछें कि आगे क्या करना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नजरअंदाज करना – ग्लूकोमा रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार ग्लूकोमा में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को कंट्रोल में रखना बेहद आवश्यकत होता है। ब्लड प्रेशर का बहुत ज्यादा या बहुत कम होना ग्लूकोमा की स्थिति को बिगाड़ सकता है, इसलिए ब्लड प्रेशर को सही रेंज में बनाए रखने की कोशिश करें। डायबिटीज वाले लोगों के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना और उसमें बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव से बचना जरूरी है।
नियमित आंखों की जांच न कराना या नजरअंदाज करना – एनसीबीआई के अनुसार कई मरीज सोचते हैं कि यदि उन्हें कोई तकलीफ महसूस नहीं हो रही है, तो जांच की जरूरत नहीं है। लेकिन ग्लूकोमा एक साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि इसमें शुरुआती लक्षण नहीं दिखते। नियमित आई प्रेशर टेस्ट, विजुअल फील्ड टेस्ट और ऑप्टिक नर्व इवेल्यूशन से बीमारी की प्रगति का पता चलता है और जरूरत पड़ने पर इलाज में बदलाव किया जा सकता है।
एनसीबीआई के मुताबिक खर्राटे और स्लीप एपनिया कुछ ऐसी वजह हैं जिनसे ग्लूकोमा का खतरा बढ़ सकता है। अगर आप ग्लूकोमा के मरीज हैं और आपको नींद से जुड़ी ये समस्याएं हैं, तो इस बीमारी को बिगड़ने से बचाने के लिए कुछ सावधानियां बरतें, जैसे कि करवट लेकर सोना और नाक बंद न होने देना।
धूम्रपान करना- एनसीबीआई के अनुसार धूम्रपान पूरे शरीर की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाता है। इससे आंखों सहित कई अंगों की कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि धूम्रपान और ग्लूकोमा के बीच संबंध पर शोध जारी है, लेकिन विशेषज्ञ आंखों की समग्र सेहत के लिए स्मोकिंग छोड़ने की सलाह देते हैं।
ग्लूकोमा का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित करके दृष्टि को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए केवल दवाएं लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरीज की जीवनशैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आई ड्रॉप्स समय पर लेना, नियमित आई चेकअप कराना, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रित रखना, धूम्रपान से बचना और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लेना—ये सभी कदम विजन लॉस के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।