
भारत के त्रिपुरा राज्य के बराबर आकार वाले दक्षिण पूर्व एशियाई देश तिमोर लेस्ते एक युवा भारतीय युवा उद्यमी के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। भारतीय उद्यमी मनोज अहिरवार ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि उन्हें तिमोर लेस्ते में लैंड करने के बाद भारतीय पासपोर्ट धारक होने के नाते दूसरे देश के नागरिकों के मुकाबले ज्यादा पूछताछ की गई। मनोज ने अहिरवार ने कहा कि उनसे इमिग्रेशन अधिकारियों ने होटल, कैश और रिटर्न टिकट को लेकर काफी देर तक सवाल जवाब किए। वह भी तब जब तिमोर लेस्ते में भारतीय पासपार्ट धारकों के लिए वीजा ऑन अराइवल की सुविधा है। उन्होंने कहा, ‘विश्वगुरु भारत का पासपोर्ट रखकर दुख हो रहा है।’
मनोज अहिरवार ने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारी उन्हें अलग ले गए और सवाल पर सवाल करते रहे। अहिरवार सिंगापुर में स्थित UniqueSide.io के संस्थापक हैं। मनोज का कहना है कि वह अब तक 20 देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि तिमोर लेस्ते उनके लिए 22वां देश था और जैसे ही वह दिली एयरपोर्ट पर उतरे उन्हें रोक दिया गया और अतिरिक्त पूछताछ की गई। मनोज ने आरोप लगाया कि भारतीय पासपोर्ट की वजह से उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा जांच का सामना करना पड़ा।
तिमोर लेस्ते में वीजा ऑन अराइवल की सुविधा – मनोज ने बताया कि बाकी अन्य टूरिस्ट के पासपोर्ट पर बिना किसी विवाद के स्टांप लगाया जा रहा था। मनोज ने एक्स पर लिखा, ‘तिमोर लेस्ते भारत समेत ज्यादातर देशों के नागरिकों को वीजा ऑन अराइवल की सुविधा देता है। सभी को एयरपोर्ट पर वीजा ऑन अराइवल दे दिया गया। जब उन्होंने मेरा पासपोर्ट देखा तो वे मुझे दूसरी तरफ ले गए और अतिरिक्त पूछताछ की।’ मनोज ने कहा कि उनसे यह पूछा गया कि क्या उनके पास आमंत्रण है और वह क्यों तिमोर लेस्ते की यात्रा कर रहे हैं, क्या उनका कोई यहां पर दोस्त है।
भारतीय उद्यमी मनोज ने दावा किया कि उन्हें होटल की बुकिंग दिखाने को बोला गया और पैसे चेक किए गए। यह भी देखा कि मनोज के पास कितना कैश है। मनोज ने कहा कि उनके पास वापसी का टिकट इसलिए नहीं था क्योंकि उन्हें सड़क के रास्ते इंडोनेशिया जाना है। बस से इंडोनेशिया जाने के लिए स्टैंड पर जाने के बाद टिकट मिलेगा। इसके बाद तिमोर लेस्ते के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इसके बाद मनोज से इंडोनेशिया का रिटर्न टिकट और ई वीजा मांगा गया। मनोज के पास संयोग से इंडोनेशिया का ई वीजा था। इसके बाद उन्हें तिमोर लेस्ते में प्रवेश करने दिया गया। मनोज को 30 दिन का तिमोर लेस्ते का वीजा दिया गया।
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