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3 सीएम, 18 मंत्री और 8 राज्यपाल, महिलाओं के मामले में UPA से कहीं आगे BJP, आंकड़ों में दिखाई हकीकत


भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए अपने अभूतपूर्व प्रयासों के बलबूते विपक्ष पर पटखनी देने की कोशिशों में जुट गई है। बीजेपी की नजर हमेशा आधी आबादी, यानी महिलाओं पर रही है। केंद्र से लेकर सभी राज्यों में उसने महिलाओं की उन्नति और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की कई कोशिशें की हैं। बीजेपी ने जाति आधारित राजनीति को कम अहमियत देकर लैंगिक आधार पर उन मतदाताओं को अधिक अहमियत दी है जो अब तक हाशिये पर पड़े थे। बीजेपी ने सोमवार को महिलाओं पर केंद्रित अपनी चुनावी मुहिम को और तेज कर दी। उसने मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की मोदी सरकार और पूर्व में रही कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में महिलाओं की भागीदारी की तुलना की है।
बीजेपी की यूपी में प्रचार की रणनीति – उत्तर प्रदेश में करीब 6-7 माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक सुनियोजित सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए बीजेपी की उत्तर प्रदेश इकाई ने अपनी सरकार में अहम पदों पर महिलाओं की मौजूदगी की ओर लगों का ध्यान आकर्षित किया है। बीजेपी ने दावा किया है कि सन 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से महिलाओं ने 33 शीर्ष संवैधानिक और राजनीतिक पदों को संभाला है। इनमें राष्ट्रपति, तीन मुख्यमंत्री, 18 केंद्रीय मंत्री, आठ राज्यपाल और तीन अन्य महत्वपूर्ण पद शामिल हैं।
बीजेपी ने अपनी सरकार की तुलना पूर्व की सरकार से करते हुए बताया है कि, सन 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार में अहम पदों पर केवल 23 महिलाएं थीं। पार्टी ने चुनावों से पहले महिलाओं के सशक्तिकरण के अपने नैरेटिव को मजबूत करने के लिए यह तुलना की है।
बीजेपी ने राज्यों में 41 महिलाओं को मंत्री बनाया – बीजेपी ने दावा किया है कि उसकी सरकारों के दौरान यूपी के मंत्रिमंडल में भी महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ी है। उसने कहा है कि साल 2014 से बीजेपी की सत्ता वाले राज्यों में 41 महिलाएं मंत्री बनीं, जबकि इसी दौरान कांग्रेस शासित राज्यों में केवल चार महिलाएं मंत्री बनाई गईं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार में अभी पांच महिला मंत्री हैं। इनमें एक कैबिनेट मंत्री, एक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और तीन राज्य मंत्री हैं।
बीजेपी ने बताया है कि सन 2014 से उसने 17 राज्यों में सरकार चलाई हैं, जबकि कांग्रेस सिर्फ चार राज्यों – केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश – में सत्ता में रही है। पार्टी ने कहा कि इनमें से केरल और तेलंगाना में दो-दो महिला मंत्री हैं, जबकि कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में एक भी महिला मंत्री नहीं है।
कांग्रेस पर महिला सशक्तिकरण का दिखावा करने का आरोप – बीजेपी ने कांग्रेस पर महिलाओं के सशक्तिकरण के मामले में सिर्फ दिखावा करने का आरोप लगाया है। उसने कहा है कि, नारी शक्ति के बारे में बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन कांग्रेस शासित राज्यों में महिलाएं नाममात्र की होती हैं। यह ज्यादा से ज्यादा कागजी नारीवाद है। आंकड़े कांग्रेस के दावों की खोखलापन उजागर करते हैं, जबकि बीजेपी ने सरकार में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित की है।
महिला नेताओं का सम्मान नहीं करता विपक्ष – बीजेपी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर की गई अभद्र टिप्पणियों को लेकर भी कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा है। यह बात उस घटना के संदर्भ में कही गई है जिसमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का मजाक उड़ाते हुए पार्टी के नेता संदीप दीक्षित को गले लगाया था। बीजेपी ने कहा है कि यह हरकत दर्शाती है कि विपक्ष वैश्विक मंच पर महिला नेताओं का सम्मान नहीं करता है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संसद में अपनी महिला प्रतिनिधियों को बोलने का मौका नहीं देती। बीजेपी ने कहा कि भले ही कांग्रेस के कुल सांसदों में महिलाओं की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत है, लेकिन बहस और सवालों में उनकी भागीदारी सिर्फ 7.4 फीसदी ही रही है। बीजेपी ने दावा किया है कि महिलाओं की आवाज का अनुपात 1.16 है, जबकि कांग्रेस का 0.57 है। बीजेपी ने पूछा है कि, क्या कांग्रेस की महिलाएं के बोलने से डरती हैं?
कांग्रेस ने पूछा सवाल- बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस ने तुरंत पलटवार किया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने पूछा है कि बीजेपी ने उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कभी किसी महिला को राज्य का पार्टी अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया? उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, बीजेपी के कई सदस्यों की ओर से महिलाओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भाषा भी किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी अपनी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से लोगों का ध्यान अहम मुद्दों से भटकाती रहती है।