
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल फिलहाल चीन के दौरे पर हैं। डोभाल मंगलवार को बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर ‘विशेष प्रतिनिधियों’ की बातचीत के 25वें दौर में शामिल होंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। बातचीत में सीमा विवाद, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ये दौरा अहम है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद चीन और भारत रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
सीमा वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि डोभाल अपने चीनी समकक्ष वांग के निमंत्रण पर चीन की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। विदेश मंत्री के अलावा उनकी चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात होनी है। यह बैठक 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले होने की वजह से और अहम हो जाती है। इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है। शी दिल्ली आए तो उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हो सकती है।
अरुणाचल में टेंशन – चीन और भारत में पूर्वी लद्दाख में सेनाओं के डिसइंगेजमेंट से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य तनाव कुछ कम हुआ है लेकिन विवाद अभी अनसुलझा है। अरुणाचल इस विवाद के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक बना हुआ है। इस भारतीय राज्य पर चीन दावा करता है और इसे जांगनान कहता है। सिक्किम और लद्दाख पर भी बात होनी है।
हालिया हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों औसे जुड़ी रिपोर्ट आमने आई हैं। ऐसे में पूर्वी सेक्टर पर फिर से ध्यान केंद्रित हुआ है। इन घटनाक्रमों ने नई दिल्ली और बीजिंग की द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशों में जटिलता की परत जोड़ दी है। इस पर भी बीजिंग में चर्चा की उम्मीद है।
मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा। यह सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था। दोनों देशों के बीच स्थिर रिश्तों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। एस जयशंकर
विशेष प्रतिनिधि तंत्र का क्या मतलब है – साल 2003 में स्थापित विशेष प्रतिनिधि तंत्र भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने का मुख्य राजनीतिक ढांचा है। इसे बनाया गया था ताकि बातचीत को सैन्य या राजनयिक चैनलों तक सीमित ना रखकर समाधान के व्यापक पहलुओं पर विचार किया जा सके। इस तंत्र से कोई अंतिम समाधान नहीं निकला है लेकिन इसने तनाव के बीच वरिष्ठ स्तर पर बातचीत के लिए व्यवस्थित मंच दिया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने SR (विशेष प्रतिनिधि) वार्ता को चीन और भारत के बीच सीमा विवाद पर बातचीत का मुख्य जरिया और आपसी हित के मुद्दों पर बातचीत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। लिन ने कहा कि डोभाल और वांग सीमा विवाद पर गहन चर्चा करेंगे और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
भारत-चीन सीमा तकरीबन 3,488 किलोमीटर लंबी है। इस पर तीन बड़े सेक्टरों में विवाद है। LAC को लेकर दोनों पक्षों के दावों में काफी अंतर है, जो विवाद की वजह बनता है।
मंगलवार की बैठक जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में बेहतरी की कोशिश है। गलवान के बाद दोनों पक्षों में लंबा गतिरोध रहा, जिसने द्विपक्षीय संबंधों के लगभग हर पहलू को प्रभावित किया। इसमें राजनीतिक जुड़ाव, व्यापार और लोगों के बीच संबंध शामिल हैं।
बीते दो वर्षों में नई दिल्ली और बीजिंग ने तनाव के मुद्दों को सुलझाने, सैनिकों के बीच टकराव को कम करने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए सैन्य और राजनयिक चैनलों का उपयोग किया है। सैनिकों की वापसी (डिसइंगेजमेंट) की प्रक्रिया ने धीरे-धीरे संबंधों में सीमित स्थिरता के लिए स्थितियां तैयार की हैं।
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