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बैटरी से चलने वाला कूलिंग सिस्टम, भारतीय कंपनी ने किया तैयार, जानें कैसे ट्रकों को ठंडा रखेगी ये तकनीक


IIT दिल्ली की एक युवा पूर्व छात्रा और उनके को-फाउंडर्स भारत की लॉजिस्टिक्स से जुड़ी एक ऐसी समस्या को हल करने में जुटे हैं, जो लगती तो आम है। लेकिन हल हो जाने पर बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। वे एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं। जिसकी मदद से ठंडा सामान ले जाने वाले ट्रकों का इंजन बंद होने पर भी उनके अंदर का कूलिंग सिस्टम चलता रहे, ताकि अंदर रखा खाना या सामान खराब ना हो। इसी समस्या को हल करने के लिए IIT दिल्ली की पूर्व छात्रा शैवी मलिक ने विवेक महिंद्राकर और धार्मिक बापोदारा के साथ मिलकर Yotuh Energy नाम का क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप शुरू किया। स्टार्टअप ऐसे इलेक्ट्रिक रेफ्रिजरेशन सिस्टम बना रहा है, जो गाड़ी के इंजन से अलग होकर अपने आप काम कर सके ताकि इसके लिए ट्रक चालू रखने की जरूरत ना हो। आइये, इस नए तकनीकी के बारे में जानते हैं।
अभी चालू रखना पड़ता है ट्रक – दरअसल, मौजूदा ट्रक में सामान ठंडा रखना पूरी तरह से गाड़ी के इंजन पर निर्भर करता है। इसका मतलब है कि ट्रक के रुक जाने पर भी उसे चालू रखना पड़ता है ताकि अंदर का कूलिंग सिस्टम काम करता रहे और उसमें रखा सामान खराब ना हो। इससे काफी डीजल खर्च होता है।
बैटरी पर काम करेगा नया कूलिंग सिस्टम – Yotuh ने इसका समाधान दोनों को अलग-अलग करके निकाला है।
इनका eRIL सिस्टम ट्रक के इंजन का इस्तेमाल किए बिना, एक अलग बैटरी से कूलिंग सिस्टम को चलाता है।
इसका मतलब है कि ट्रक रुकने पर भी उसे चालू रखने की जरूरत नहीं होती है।
या फिर गाड़ी खराब होने पर भी कूलिंग अपने-आप बंद नहीं होगी। इस सिस्टम को इंटरनल-कंबशन और इलेक्ट्रिक दोनों तरह की गाड़ियों में लगाया जा सकता है।
बार-बार डोर खुलने पर भी मैनेज करेगा कूलिंग – यह टेक्नोलॉजी खास तौर पर छोटे कमर्शियल वाहनों के लिए बनाई गई है, जो भारत के शहर के अंदर डिलीवरी करते हैं। Yotuh का कहना है कि उसका अडैप्टिव कूलिंग सिस्टम काम करने की स्थितियों के हिसाब से अपने-आप काम कर सकता है। इतना ही नहीं इसका डोर सेंसर बार-बार डिलीवरी के लिए रुकने पर कूलिंग को मैनेज करने में मदद करते हैं। यह सिस्टम तापमान पर नजर रखता है और पल-पल की जानकारी देता रहता है।
90–95% मामलों में असरदार रहा कूलिंग सिस्टम- कंपनी के मुताबिक, उनके ग्राहक खराब होने वाले सामान की 1,000 से ज्यादा डिलीवरी सुरक्षित तरीके से कर चुके हैं। इस दौरान गाड़ियां 3 लाख किलोमीटर से ज्यादा चलीं और 90–95% मामलों में सामान का तापमान एकदम सही बना रहा। यह डेयरी और आइसक्रीम से लेकर फ्रोजन फूड तक हर चीज के लिए जरूरी है, क्योंकि कोल्ड चेन टूटने से डिलीवरी की समस्या प्रोडक्ट के नुकसान में बदल सकती है।
बचा सकती है 3-36 टन CO2 – Yotuh खुद को सिर्फ रेफ्रिजरेशन सप्लाई करने वाली कंपनी के तौर पर पेश नहीं कर रही है। इसका मकसद छोटे ऑपरेटर्स के लिए रेफ्रिजेरेटेड ट्रांसपोर्टेशन को आसान बनाना है। कंपनी का कहना है कि उसकी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल के आधार पर हर यूनिट से सालाना 3-36 टन CO2 बचा सकती है। साथ ही रेफ्रिजरेशन की ऑपरेटिंग लागत को 75% तक कम कर सकती है।