
क्या आपके दिमाग में कोई पुरानी बातचीत बार-बार चलती रहती है? किसी गलती को याद करके आप सोचते रहते हैं कि “काश मैंने ऐसा नहीं कहा होता”? या भविष्य में होने वाली किसी घटना को लेकर एक ही चिंता बार-बार मन में घूमती रहती है? अगर ऐसा कभी-कभार होता है, तो यह सामान्य मानसिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन जब वही विचार बार-बार लौटकर आपका ध्यान, नींद, काम और मन की शांति प्रभावित करने लगें, तो इसे रिपीटेटिव थिंकिंग या बार-बार सोचने की आदत कहा जा सकता है। इसे चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा पाया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बार-बार सोचने वाला हर व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहा है। लेकिन, आप कुछ बदलाव कर इस बार-बार सोचने (Repetitive Thinking) के चक्र को ब्रेक कर सकते हैं।
Repetitive Thinking क्या होती है? – किसी विचार, घटना, समस्या या चिंता पर बार-बार उसी तरीके से विचार करते रहना, जबकि सोचने से कोई नया समाधान नहीं निकल रहा हो। इसका एक सामान्य रूप रूमिनेशन है, जिसमें व्यक्ति बीती घटनाओं, अपनी गलतियों या नकारात्मक भावनाओं को बार-बार याद करता रहता है। इसमें ऐसा लगता है जैसे हमारा दिमाग बार-बार वही विचार दोहरा रहा हो, और किसी अलग नतीजे की उम्मीद कर रहा हो।
बार-बार एक ही चीज सोचना कैसे बंद करें (Designed By Magnific) – क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार बार-बार एक ही विचार में उलझने से बाहर निकलना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन दृढ़ निश्चय से आप इसे आसान बना सकते हैं।
अपना ध्यान वर्तमान पर केंद्रित करें – सचेत रहने का मतलब है वर्तमान क्षण में जीना। किसी विचार के पीछे भागने के बजाय, उसे ध्यान से देखें और उसे गुजरने दें। इस स्थिति में आपको वर्तमान स्थिति में फोकस करना चाहिए, किसी बीती घटना या चीज के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए। इसके लिए आप मौजूदा समय में पज्जल, चेस या वीडियो गेम आदि खेल सकते हैं। इसके अलावा पेटिंग या डांसिंग भी आपको आराम पहुंचा सकती है।
कागज पर लिख लें – अगर कुछ विचार बार-बार मन में आते हैं, तो उन्हें लिख लें। फिर, उस कागज को कहीं सुरक्षित जगह पर रख दें, जैसे कि दराज में या लिफाफे में। यह अभ्यास देखने में भले ही बहुत सरल लगे, लेकिन इससे आपको उन विचारों से दूरी बनाने में मदद मिलती है।
बार-बार एक ही चीज सोचना कैसे बंद करें (Designed By Magnific)- हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार कभी-कभी तीव्र विचारों को शांत होने देना ही सबसे अच्छा होता है; अन्यथा, वे अनिश्चित काल तक बने रह सकते हैं। ऐसा करने के लिए, चिंता करने के लिए समय निर्धारित करें। जब चिंताजनक विचार मन में आएं, तो उन्हें पहचानें, लेकिन खुद से कहें कि अभी चिंता करने का समय नहीं है और आप उनसे बाद में निपटेंगे। फिर अपने चुने हुए एक निश्चित समय पर, उन विचारों पर विचार करें और उन पर काम करें।
रेगुलर एक्सरसाइज करें – एनसीबीआई के अनुसार एंग्जायटी की वजह से होने वाली ओवरथिंकिंग को दूर करने के लिए आप एक्सरसाइज कर सकते हैं। इससे आपका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और ब्रेन तक ऑक्सिजन युक्त ब्लड पहुंचता है। इससे आपको शांति मिलती है और आपकी सोच सकारात्मक होने लगती है। साथ ही, एंग्जायटी और इससे होने वाली ओवरथिंकिंग में राहत मिलती है।
माइंडफुलनेस और गहरी सांसे लेना – बार-बार एक ही तरह की सोच में पुरानी घटनाओं या भविष्य की चिंताओं के बारे में लगातार सोचते रहना शामिल है। माइंडफुलनेस इस चक्र को तोड़ने में मदद कर सकती है; यह ध्यान को वापस वर्तमान पल पर ले आती है। धीरे-धीरे और गहरी सांस लेने से नर्वस सिस्टम शांत हो सकता है, मानसिक तनाव कम हो सकता है और किसी विचार और आपकी प्रतिक्रिया के बीच थोड़ी जगह बन सकती है। इन दोनों का नियमित अभ्यास मन को अधिक शांत और स्थिर महसूस कराने में मदद कर सकता है।
स्लीप साइकिल को मेंटेन करें – पर्याप्त नींद लेने से बार-बार सोचने की आदत में आराम मिलता है। स्लीप साइकिल को मेंटेन करने से आप फोकस बेहतर होता है और क्रिएटिव चीजोंं में खुद के ध्यान को लगा पाते हैं। इसके अलावा, पर्याप्त नींद लेने से आपको मानसिक आराम मिलता है।
रिपिटेटिव थिंकिंग को रोकने का मतलब दिमाग को हर नकारात्मक विचार से खाली करना नहीं है। असली लक्ष्य है—विचार आने पर उसे पहचानना, तथ्य और कल्पना में अंतर करना और जरूरत पड़ने पर ध्यान को एक्शन की ओर ले जाना। अगर बार-बार आने वाले विचार आपकी जिंदगी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं, तो मानसिक रोग विशेषज्ञ से मदद लेना कमजोरी नहीं बल्कि एक समझदारी भरा कदम है।
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