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भारत के दो दोस्‍तों में तनाव, आर्मेनिया ने क‍िया यूरोपीय संघ में शामिल होने का ऐलान, भड़का रूस


आर्मेनिया के यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने के फैसले पर रूस भड़क गया है। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान ने ऐलान किया है कि उनका देश EU की सदस्यता के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस पर रूसी सरकार ने एतराज जताते हुए कहा है कि EU की सदस्यता के लिए आवेदन करने पर आर्मेनिया को EAEU (यूरेशियन इकॉनमिक यूनियन) में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। भारत की नजर इस पर लगी है क्योंकि रूस और आर्मेनिया, दोनों से ही भारत के अच्छे रिश्ते हैं।
निकोल पशिन्यान ने अपने एक बयान में कहा है कि आर्मेनिया जल्द ही यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए आवेदन करने जा रहा है। आर्मेनियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) तभी सही रहता है, जब चर्चा एक अहम मोड़ पर पहुंच जाए और उसके लिए आसानी से रोडमैप तैयार करना संभव हो।
आर्मेनिया को यह तय करना होगा कि वह EU में शामिल होने या EAEU में अपनी सदस्यता बनाए रखने पर देशव्यापी जनमत संग्रह कराएगा या नहीं। यह फैसला दिसंबर 2026 तक लेना होगा, जब EAEU के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में आर्मेनिया से जुड़े संभावित अगले कदमों पर चर्चा की जाएगी।
EU की सदस्या लेंगे: निकोल – पशिन्यान ने कहा है कि आर्मेनिया को सबसे पहले EU की सदस्यता के लिए आधिकारिक आवेदन करना होगा। यह एक लंबी प्रक्रिया है और हम इसे जल्द ही इसे शुरू करेंगे। कम से कम यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के अपने सहयोगियों की अपील के जवाब में ये करेंगे। आर्मेनिया की संसद ने बीते साल EU में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक कानून पारित किया है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए आर्मेनिया के आवेदन के बाद उनको यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के भीतर बड़े विरोधाभासों का सामना करना पड़ेगा। आर्मेनिया को व्यापार, फाइटो-सैनिटरी उपायों, कस्टम और दूसरे क्षेत्रों में अपने कानूनों को यूरोपीय मानकों में ढालने की व्यापक प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
पुतिन ने भी जताया एतराज -रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही इस मुद्दे पर अपपनी नाराजगी जता चुके हैं। EU में शामिल होने का मतलब होगा कि EAEU के साथ आर्मेनिया का सहयोग अपने आप खत्म हो जाएगा और उससे जुड़ रियायतें भी खत्म हो जाएंगी। रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान ने कहा है कि आर्मेनिया को इस पर जनमत संग्रह कराना चाहिए कि उसे EU में शामिल होना है या EAEU में बने रहना है।