
ब्लैडर में सूजन यानी Cystitis एक ऐसी स्थिति है जिसमें ब्लैडर की लाइनिंग में इंफ्लेमेशन हो जाती है। इसका सबसे आम कारण बैक्टीरियल यूटीआई है, लेकिन इंटरस्टिशियल सिस्टाइटिस (Interstitial Cystitis) जैसी गैर संक्रमित स्थिति में भी ब्लैडर संबंधित लक्षण हो सकते हैं। बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन, अचानक पेशाब जाना, पेट के निचले हिस्से में दर्द और पेशाब में खून या तेज गंध इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
ब्लैडर में इंफ्लेमेशन (Designed By Magnific) – बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन महसूस होना या अचानक पेशाब जाने की इच्छा इतनी तीव्र होना कि पेशाब रोकना मुश्किल लगे—इन लक्षणों को कई लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ये ब्लैडर (मूत्राशय – Bladder) में सूजन यानी सिस्टाइटिस (Cystitis) के संकेत हो सकते हैं। सिस्टाइटिस में ब्लैडर की लाइनिंग में इंफ्लेमेशन हो जाती है। इसका सबसे आम कारण बैक्टीरियल ब्लैडर इंफेक्शन यानी UTI है, लेकिन हर बार सिस्टाइटिस संक्रमण की वजह से नहीं होता। विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्लैडर इंफेक्शन में पेशाब में जलन, बार-बार या तेज पेशाब की इच्छा, पेट के निचले हिस्से में असहजता और हल्का लाल या तेज गंध के साथ पेशाब आने जैसे लक्षण इस समस्या में हो सकते हैं।
ब्लैडर में सूजन (Cystitis) क्यों होती है? – मैयोक्लीनिक के अनुसार सिस्टाइटिस का अर्थ है ब्लैडर में इंफ्लेमेशन यानी सूजन। ब्लैडर एक मस्कुलर अंग है, जिसमें पेशाब जमा होता है और सही समय पर शरीर से बाहर निकलता है। जब ब्लैडर की अंदरूनी लाइनिंग में इंफ्लेमेशन होता है, तो पेशाब जमा होने या ब्लैडर भरने के दौरान जलन महसूस हो सकती है। इसका परिणाम बार-बार पेशाब आने की इच्छा और पेट के निचले हिस्से में अहजसता के रूप में सामने आ सकता है। एक्यूट सिस्टाइटिस का सबसे आम कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन है, लेकिन कुछ लोगों में इंटरस्टिशियल सिस्टाइटिस सिंड्रोम जैसी क्रॉनिक कंडिशन के कारण भी ब्लैडर से जुड़े लक्षण महसूस हो सकते हैं।
बार-बार पेशाब आना – सिस्टाइटिस में व्यक्ति को सामान्य से ज्यादा बार पेशाब करने की जरूरत महसूस हो सकती है। कई बार पेशाब की मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन ब्लैडर खाली करने की इच्छा बार-बार होती रहती है। क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार बार-बार पेशाब आने को यूटीआई की संभावना के साथ संबंधित पाया गया है। लेकिन, हर बार पेशाब आने की प्रवृत्ति को केवली यूटीआई ही नहीं माना जा सकता है। क्योंकि यह लक्षण अन्य समस्याओं की ओर भी इशारा करता है।
पेशाब करते समय जलन – अमेरिकन फैमिली फिजिशियन के अनुसार पेशाब करते समय अहसजता या जलन सिस्टाइटिस का सबसे पहचाना जाने वाला लक्षण है। मेडिकल भाषा में इसे डाइसुरिया (Dysuria) कहा जाता है। जब यूरिनरी ट्रैक्ट और ब्लैडर में इंफ्लेमेशन या इंफेक्शन होता है, तो यूरिन पास करते समय प्रभावित टिशू में असहजता और जलन महसूस हो सकती है।
अचानक पेशाब जाने की तीव्र इच्छा महसूस होना – हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार कई बार व्यक्ति को अचानक इतनी तेज पेशाब की इच्छा होती है कि उसे लगता है कि तुरंत यूरिन पास करने के लिए जाना पड़ेगा। इसे यूरिनरी अर्जेंसी कहा जाता है। ब्लैडर इंफ्लेमेशन के दौरान ब्लैडर अधिक संवेदनशील हो सकता है, जिसके कारण कम मात्रा में यूरिन होने पर भी पेशाब करने की इच्छा महसूस हो सकती है। इंटरस्टिशियल सिस्टाइटिस में भी यूरिनरी अर्जेंसी और बार-बार यूरिन जाने का लक्षण देखने को मिलता है।
ब्लैडर में इंफ्लेमेशन (Designed By Magnific) – हेल्थ डायरेक्ट के अनुसार सिस्टाइटिस में पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द, प्रेशर या असहजता महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में ब्लैडर भरने पर असहजता ज्यादा महसूस होती है। ब्लैडर इंफेक्शन के मामले में पेट के निचले हिस्से में दर्द या असहजता एक सामान्य लक्षणहै। वहीं इंटरस्टिशियल सिस्टाइटि में ब्लैडर, पेट के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया पर दर्द या दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है। लक्षण समय-समय पर बढ़ सकते हैं।
पेशाब में खून या तेज गंध – मैयोक्लीनिक के अनुसार सिस्टाइटिस या ब्लैडर इंफेक्शन में यूरिन में झाग, खून या असामान्य तेज गंध जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। पेशाब में खून दिखाई देना हैमाटूरिया (Hematuria) कहलाता है। हालांकि यूरिन में ब्लड को केवल Cystitis मानकर छोड़ना सही नहीं है। किडनी स्टोन, अन्य यूरिनरी स्थितियां और कुछ गंभीर समस्याएं भी हैमाटूरिया का कारण बन सकती हैं। इसलिए पेशाब में दिखाई देने वाला खून होने पर मेडिकल जांच कराना जरूरी है। हालांकि यह संकेत बेहद गंभीर स्थिति या दुर्लभ मामलों में ही सामने आता है।
पेशाब जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि यूरिन में स्पष्ट रूप से खून आना या पेशाब रुक जाने पर भी डॉक्टर से सलाह लेने जरूरी होता है। ध्यान रखें कि ब्लैडर में इंफ्लेमेशन का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। बैक्टीरियल इंफेक्शन होने पर डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं दे सकते हैं, जबिक इंटरस्टिशियल सिस्टाइटिस जैसे मामलों में इलाज का तरीका अलग हो सकता है।
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